क्रिकेटर आकाशदीप बने बिहार पुलिस में DSP, भावुक मां और पत्नी के साथ नियुक्ति पत्र लेने पहुंचे पटना

बिहार सरकार की 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना के तहत भारतीय क्रिकेटर आकाशदीप को DSP पद पर नियुक्त किया गया है, जिसके बाद उन्होंने और उनके परिवार ने अपनी खुशी जाहिर की।

बिहार के लाल आकाशदीप बने पुलिस उपाधीक्षक (DSP)

बिहार में खेलों और खिलाड़ियों के प्रति नजरिया अब तेजी से बदल रहा है। इस बड़े बदलाव की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर राजधानी पटना में देखने को मिली, जब भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाशदीप को पुलिस विभाग में DSP के पद पर नियुक्त किया गया। बिहार सरकार की लोकप्रिय योजना 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' के तहत उन्हें यह सम्मानजनक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस गौरवशाली पल का गवाह बनने के लिए पटना का ऊर्जा ऑडिटोरियम पूरी तरह तैयार था। समारोह में जब आकाशदीप अपना नियुक्ति पत्र लेने पहुंचे, तो उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। इस खुशी के मौके पर उनकी मां और उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद थीं, जिन्हें देखकर पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।

'पहले खेलना गुनाह माना जाता था' - आकाशदीप

नियुक्ति पत्र हासिल करने के बाद भारतीय क्रिकेटर आकाशदीप ने अपने पुराने दिनों के संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब बिहार में खेल-कूद में समय बिताना किसी गुनाह से कम नहीं समझा जाता था। उन्होंने बताया कि जब खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाकर घर लौटते थे, तो समाज और आस-पड़ोस के लोग उन्हें बहुत ही अलग और नकारात्मक नजरिए से देखते थे।

उन्होंने बताया कि उस दौर में माता-पिता भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर हमेशा गहरे असमंजस और चिंता में डूबे रहते थे। लेकिन अब स्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। सरकार की नई खेल नीति ने न केवल खेल को सम्मान दिया है, बल्कि खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देकर उनका भविष्य भी पूरी तरह सुरक्षित किया है। इस ऐतिहासिक पहल से अब राज्य के युवाओं के भीतर एक नया और मजबूत आत्मविश्वास जागा है।

भावुक हुईं मां और खुशी से झूम उठीं पत्नी

इस बेहद खास मौके पर आकाशदीप की मां अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। वह पूरी तरह से भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका बेटा महज खेल के दम पर इतने बड़े सरकारी पद पर पहुंच जाएगा। उन्होंने बिहार के अन्य अभिभावकों से एक खास अपील भी की। मां ने कहा कि अब समय बदल गया है, इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों को खेलने से रोकना नहीं चाहिए, बल्कि उनके सपनों को सच करने के लिए उनका पूरा सहयोग करना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ, आकाशदीप की पत्नी भी अपने पति की इस शानदार उपलब्धि पर बेहद खुश नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए एक ऐसा गर्व का क्षण है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह सम्मान आकाशदीप की बरसों की कड़ी मेहनत और उनके अटूट समर्पण का ही फल है।

बिहार के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा

आकाशदीप ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार के कोने-कोने में छिपे प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। इस कदम से अब माता-पिता को भी पूरा भरोसा हो गया है कि अगर उनका बच्चा खेल के मैदान पर मेहनत करेगा, तो उसका भविष्य सुरक्षित रहेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के इस सकारात्मक रवैये और मजबूत सहयोग से आने वाले दिनों में बिहार से कई अन्य प्रतिभावान खिलाड़ी निकलेंगे, जो न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भी देश और अपने गृह राज्य का नाम पूरे गर्व के साथ रोशन करेंगे।

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