मध्य प्रदेश में पेपर लीक पर लगाम, परीक्षा घोटालों के लिए गठित किए गए 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट

देशभर में पेपर लीक के बढ़ते मामलों के बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में अब विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी और तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाएगा।

परीक्षा घोटालों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का सख्त रुख

नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध के बीच मध्य प्रदेश सरकार और हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य में होने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और गड़बड़ी करने वालों पर नकेल कसने के लिए हाई कोर्ट ने चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया है। यह कदम लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। वर्ष 2020 से जून 2026 के बीच मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की गई कुल 73 परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने प्रदेश में काफी हंगामा मचाया था, जिसके बाद यह कठोर निर्णय लिया गया है।

प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में विशेष अदालतें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की विशेष पहल पर यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश के चार प्रमुख जिलों यानी भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य में पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए मोहन यादव सरकार द्वारा हाल ही में मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में किए गए संशोधनों ने व्यापक रूप से सुर्खियां बटोरी थीं। इन विशेष अदालतों के लिए नामित न्यायाधीशों की सूची इस प्रकार है:

  • भोपाल: प्रवीण पटेल, 18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश।
  • ग्वालियर: विशाल अखंड, 8वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश।
  • जबलपुर: आनंद कुमार सेहलाम, 27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश।
  • इंदौर: डॉ. शुभ्रा सिंह, 26वें जिला एवं सत्र न्यायाधीश।

तीन महीने में पूरा होगा ट्रायल

इन विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दर्ज किए गए सभी मामलों की सुनवाई करने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही, राज्य या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज मामलों को भी इन अदालतों में प्राथमिकता दी जाएगी। हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी मामले में चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन माह की समय सीमा के भीतर ट्रायल की प्रक्रिया पूरी करके अंतिम निर्णय सुना दिया जाए। न्यायपालिका का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल परीक्षा घोटालों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित होगा, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की पवित्रता, निष्पक्षता और आम जनता का विश्वास भी फिर से मजबूत होगा। यह कदम संगठित परीक्षा गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में एक बड़ी कानूनी भूमिका निभाएगा।

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