30 साल तक ग्रामीणों का दोस्त रहा 'गंगाराम', अब NCERT की किताबों में पढ़ेंगे छात्र

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव में रहने वाले मगरमच्छ 'गंगाराम' की अनोखी और भावुक कहानी को अब NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। यह मगरमच्छ तीन दशकों तक इंसान और वन्यजीवों के बीच आपसी प्रेम और सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल बना रहा।

इंसान और मगरमच्छ की अनूठी दोस्ती

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित बावा मोहतरा गांव के चर्चित मगरमच्छ 'गंगाराम' की कहानी ने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना ली है। एक ऐसा जीव जिसे आमतौर पर लोग खतरनाक और हिंसक मानते हैं, गंगाराम ने अपने व्यवहार से इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया था। करीब 30 साल तक गांव के तालाब में रहने के दौरान उसने कभी भी किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचाया। इसी मानवीय और प्रकृति प्रेम की मिसाल को देखते हुए, अब उसकी कहानी को NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, जिससे देशभर के बच्चे वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के महत्व को समझ सकेंगे।

गांव का सदस्य बन चुका था गंगाराम

बावा मोहतरा गांव के लोगों के लिए गंगाराम महज एक जंगली जानवर नहीं था, बल्कि वह उनके परिवार के एक अभिन्न सदस्य जैसा था। ग्रामीण उसके साथ इतने घुल-मिल गए थे कि उसे देखकर कोई डरता नहीं था और न ही वह किसी को परेशान करता था। यह जीव और इंसान के बीच के उस गहरे भरोसे को दर्शाता है, जो आधुनिक दुनिया में बहुत कम देखने को मिलता है। जब गंगाराम की मृत्यु हुई, तो पूरा गांव शोक में डूब गया था। उसके अंतिम संस्कार में गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए थे और उसकी याद में उस दिन कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला था, जो ग्रामीणों के उससे लगाव की गहराई को साबित करता है।

पाठ्यक्रम के जरिए पर्यावरण का संदेश

NCERT द्वारा इस कहानी को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह सिखाना है कि वन्यजीवों और इंसानों के बीच सामंजस्य बनाकर रहना कितना आवश्यक है। आने वाली पीढ़ियां अब गंगाराम के उदाहरण से पर्यावरण संतुलन और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का पाठ पढ़ेंगी। पाठ्यक्रम के विशेषज्ञों का मानना है कि गंगाराम की जीवन शैली यह संदेश देती है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना ही भविष्य के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है। इस कहानी के माध्यम से बच्चों को बताया जाएगा कि हर जीव का अपना एक महत्व होता है और पर्यावरण के संरक्षण में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

सह-अस्तित्व की एक प्रेरणादायक मिसाल

गंगाराम का पूरा जीवन एक संदेश था कि यदि मनुष्य वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाए, तो दोनों एक साथ शांतिपूर्ण तरीके से रह सकते हैं। बावा मोहतरा गांव के लोगों ने जिस तरह से दशकों तक इस मगरमच्छ को अपना संरक्षण और प्यार दिया, वह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अनोखा उदाहरण है। अब यह मगरमच्छ केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रकृति के प्रति प्रेम और सह-अस्तित्व की एक प्रेरणा बन चुका है। आने वाले समय में छात्र जब यह अध्याय पढ़ेंगे, तो उन्हें न केवल एक मगरमच्छ के बारे में पता चलेगा, बल्कि वे यह भी समझेंगे कि बिना किसी डर के हम कैसे एक-दूसरे के साथ मिलकर इस प्रकृति का हिस्सा बने रह सकते हैं।

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