मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत, री-जॉइनिंग के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता खत्म

मध्य प्रदेश सरकार ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को सरल बनाते हुए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की बाध्यकारी शर्त को हटा दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग ने यह बड़ा निर्णय लिया है जिससे हजारों शिक्षकों को फायदा मिलेगा।

अतिथि शिक्षकों के लिए राहत भरा आदेश

मध्य प्रदेश में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने अतिथि शिक्षकों की री-जॉइनिंग यानी दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब इन शिक्षकों को अपनी पिछली सेवा के दौरान 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस यानी ऑनलाइन उपस्थिति की अनिवार्य शर्त को पूरा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के हजारों गेस्ट टीचर्स को बड़ी सहूलियत मिलेगी।

क्यों लिया गया यह निर्णय

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा पहले यह नियम लागू किया गया था कि गेस्ट टीचर्स को दोबारा सेवा में शामिल होने के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस का मापदंड पूरा करना होगा। हालांकि, इस नियम के कारण बड़ी संख्या में योग्य और अनुभवी शिक्षक पुनः नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत स्तर पर अतिथि शिक्षकों ने सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रखी थीं। इन परेशानियों पर गंभीरता से विचार करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश जारी किए, जिसके बाद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने इस कठिन शर्त को हटाने का फैसला लिया।

नियुक्ति प्रक्रिया होगी सुगम

नए आदेशों के लागू होने के बाद अब उन गेस्ट टीचर्स को भी वापस काम पर लौटने का मौका मिलेगा, जो अन्य सभी शैक्षणिक योग्यताओं को तो पूरा करते थे, लेकिन उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड के कारण फंस गए थे। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना और स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण बेहतर बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। इस कदम से स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी होगी और शिक्षण व्यवस्था में निरंतरता बनी रहेगी।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। शैक्षणिक सत्र के दौरान कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने के कारण गेस्ट टीचर्स पर ही पढ़ाई की मुख्य जिम्मेदारी होती है। पहले के नियमों के चलते योग्य शिक्षक भी दोबारा कार्यभार संभालने में असमर्थ महसूस कर रहे थे। अब इस शर्त के हट जाने से स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता में सुधार आएगा और पढ़ाई व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी। सरकार के इस फैसले का प्रदेश भर के अतिथि शिक्षक समुदाय ने स्वागत किया है, क्योंकि इससे उनके भविष्य और रोजगार से जुड़ी अनिश्चितताएं काफी हद तक कम हो गई हैं। राज्य सरकार की इस पहल से अब बिना किसी रुकावट के अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं दोबारा शुरू कर पाएंगे।

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