मोतिहारी में बड़ा फर्जीवाड़ा: बालिग आरोपी को नाबालिग साबित करने के लिए हेडमास्टर ने दस्तावेजों में की हेराफेरी

बिहार के मोतिहारी में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक आरोपी को किशोर न्याय परिषद में नाबालिग साबित करने के लिए स्कूल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई। प्रधानाध्यापक पर लगे गंभीर आरोपों के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

शिक्षक की भूमिका पर उठा बड़ा सवाल

समाज में शिक्षक का स्थान सबसे उच्च माना जाता है, जिन्हें बच्चों का भविष्य संवारने वाला कहा जाता है। लेकिन बिहार के मोतिहारी से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरी शिक्षा व्यवस्था और कानून की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर एक आपराधिक मामले के आरोपी को बचाने के उद्देश्य से सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और अब पुलिस ने इस बाबत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला मोतिहारी के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र से संबंधित है। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बैरिया में पदस्थापित प्रधानाध्यापक पर आरोप है कि उन्होंने एक बालिग आरोपी को नाबालिग सिद्ध करने के लिए स्कूल से जारी होने वाले स्थानांतरण प्रमाण पत्र यानी टीसी (TC) में जन्मतिथि से छेड़छाड़ की। यह मामला तब प्रकाश में आया जब किशोर न्याय परिषद (Juvenile Justice Board) में चल रही एक सुनवाई के दौरान दस्तावेजों का मिलान किया गया। आरोपी अखिलेश कुमार से जुड़े एक आपराधिक मामले में उसकी उम्र का सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान कोर्ट में स्कूल का प्रमाण पत्र और आरोपी के पिता द्वारा दायर एक शपथ पत्र पेश किया गया, जिसमें खेल होने का शक गहराया।

स्कूल रिकॉर्ड और प्रमाण पत्र में अंतर

न्यायालय में जब इस मामले की सुनवाई चल रही थी, तब विद्यालय के वर्तमान प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार को भी पेश होने का निर्देश दिया गया। उन्होंने न्यायालय के समक्ष अपना बयान दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया कि स्कूल के आधिकारिक नामांकन पंजी के अनुसार, अखिलेश कुमार का दाखिला कक्षा तीन में 14 सितंबर 2011 को हुआ था। स्कूल के रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2003 दर्ज है। वहीं, जो स्थानांतरण प्रमाण पत्र न्यायालय में आरोपी की तरफ से पेश किया गया था, उसमें जन्मतिथि को बदलकर वर्ष 2008 दर्शाया गया था। इस हेरफेर से साफ पता चलता है कि आरोपी की उम्र को पांच वर्ष कम कर उसे कानून की नजर में नाबालिग दिखाने का एक सुनियोजित प्रयास किया गया था।

पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

जब जन्मतिथि के आंकड़ों में यह भारी अंतर पकड़ा गया, तो किशोर न्याय परिषद के बेंच क्लर्क नरेंद्र सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुफ्फसिल थाने में लिखित शिकायत दी। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया है कि न्यायालय को गुमराह करने, न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और गलत तरीके से लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इस शिकायत के आधार पर मुफ्फसिल थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

आगे की कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने अब इस मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। जांच के दायरे में कई महत्वपूर्ण सवाल हैं, जैसे कि दस्तावेजों में यह बदलाव किस स्तर पर किया गया और इसमें प्रधानाध्यापक के अलावा क्या किसी और व्यक्ति की भी संलिप्तता है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या प्रमाण पत्र जारी करने के समय स्कूल के अन्य कर्मचारियों या बाहरी लोगों ने इसमें कोई भूमिका निभाई थी। यदि जांच में लगाए गए सभी आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ जालसाजी, फर्जीवाड़ा और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मोतिहारी पुलिस का कहना है कि वे इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि दोषियों को बख्शा न जाए।

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