मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: अधिकमास में कब है यह व्रत? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन की पूरी विधि

ज्येष्ठ अधिकमास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 8 जून, सोमवार को रखा जाएगा। जानिए इस दिन के शुभ मुहूर्त और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का सही तरीका।

हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण की उपासना, स्मरण और व्रत को समर्पित होता है। सनातन धर्मग्रंथों के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास (अगस्त-सितंबर) की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था, और तभी से यह तिथि अत्यंत पावन मानी जाती है। यही कारण है कि प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी को श्रीकृष्ण की आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। आइए जानते हैं कि अधिकमास 2026 की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कब है, साथ ही पुरुषोत्तम मास की इस जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या रहेगी।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। सच्चे मन से किए गए व्रत और उपासना से साधक को पापों से मुक्ति तथा मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस समय अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास चल रहा है, जो स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस बार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व और भी कई गुना बढ़ जाता है।

अधिकमास मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 के शुभ मुहूर्त

  • ज्येष्ठ अधिकमास 2026 में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 8 जून, दिन सोमवार को रखा जाएगा।
  • ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।
  • अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
  • सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त शाम 7 बजकर 18 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।

इस प्रकार करें मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा

  • इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद घर के मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
  • अब एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
  • हाथ में जल, फूल और तुलसी का पत्ता लेकर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लें।
  • श्रीकृष्ण की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करें, उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और शृंगार करें।
  • भगवान को चंदन का तिलक लगाएं तथा पीले रंग के फल, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  • अब प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
  • इसके बाद मंत्र जाप करें और आरती करके अपनी पूजा का समापन करें।
  • रात 12 बजे के बाद अथवा अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पूजा करके अपने व्रत का पारण करें।

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