आधुनिक युग का असली पावर सेंटर
आज के दौर में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और ग्रीन एनर्जी तकनीक के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। इन तकनीकी उत्पादों की बढ़ती मांग ने दुनिया के सामने एक नई हकीकत पेश की है। यह दुनिया केवल टेक कंपनियों के फैसलों से नहीं चलती, बल्कि इसकी असली लगाम उन पांच देशों के हाथों में है, जिनके पास दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक खजाने दबे हुए हैं।
ये 5 देश जो तय करते हैं वैश्विक सप्लाई चेन
दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले इन संसाधनों के मामले में पांच देशों का दबदबा सबसे अधिक है:
- चीन: यहाँ रेयर अर्थ एलिमेंट्स का सबसे बड़ा भंडार है, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अनिवार्य हैं।
- कांगो: कोबाल्ट का सबसे बड़ा स्रोत होने के कारण बैटरी निर्माण में इस देश की भूमिका सबसे अहम है।
- चिली: लिथियम और तांबे के विशाल भंडारों के साथ यह देश वैश्विक ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन का केंद्र बना हुआ है।
- सऊदी अरब: कच्चे तेल के विशाल भंडार के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार में आज भी इस देश की भूमिका निर्णायक है।
- ऑस्ट्रेलिया: यूरेनियम और लोहे के साथ अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया को सप्लाई करने वाला प्रमुख देश है।
क्यों है इन देशों का वर्चस्व
ये संसाधन न केवल स्मार्टफोन और कंप्यूटर बनाने में काम आते हैं, बल्कि रक्षा उपकरणों और मेडिकल सेक्टर के लिए भी अनिवार्य हैं। इन खनिजों और ऊर्जा संसाधनों के बिना दुनिया की फैक्ट्रियों का पहिया रुक जाएगा। यदि ये पांच देश अपनी सप्लाई चेन को नियंत्रित करने या रोकने का निर्णय लेते हैं, तो वैश्विक स्तर पर तकनीक, रक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है। यह स्पष्ट है कि भविष्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था इन्हीं भौगोलिक और प्राकृतिक संसाधनों के चारों ओर घूमेगी।
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