आसमान में दिखा अद्भुत नजारा
अंतरिक्ष की दुनिया में अक्सर कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसे मंजर देखने को मिलते हैं जो विज्ञान और तकनीक की सीमाओं को चुनौती देते नजर आते हैं। हाल ही में चीन के शिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से एक ऐसा ही वाकया सामने आया है जिसने दुनिया भर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को चौंका कर रख दिया है। चीन का लॉन्ग मार्च-3बी (Long March-3B) रॉकेट जैसे ही अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ, उस पर आसमान से कड़कड़ाती बिजली आ गिरी। किसी भी रॉकेट के लिए लॉन्च के समय ऐसी स्थिति का सामना करना किसी बड़े हादसे का संकेत हो सकता है, लेकिन इस रॉकेट ने जो किया वह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
लॉन्च के दौरान हुआ बड़ा धमाका
घटना उस समय की है जब लॉन्ग मार्च-3बी रॉकेट ने उड़ान भरी थी। लॉन्च पैड छोड़ने के महज कुछ सेकंड बाद ही, जब रॉकेट हवा में चंद सौ मीटर की ऊंचाई पर था, तभी बादलों को चीरती हुई नीली-सफेद बिजली की एक जोरदार लकीर सीधे रॉकेट से जा टकराई। वहां मौजूद लोग एक पल के लिए सहम गए, क्योंकि सबको लगा कि अब एक बड़ा विस्फोट होने वाला है। आमतौर पर, रॉकेट लॉन्च के दौरान ऐसी कोई भी अप्रत्याशित घटना मिशन की विफलता का कारण बनती है। लेकिन इस रॉकेट ने न केवल उस बिजली के झटके को झेला, बल्कि अपनी गति और दिशा में बिना किसी बदलाव के अपना सफर जारी रखा।
मिशन का मुख्य लक्ष्य: तियानलियान-2-06 सैटेलाइट
इस खतरनाक हमले के बावजूद, रॉकेट का मिशन शत-प्रतिशत सफल रहा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य तियानलियान-2-06 (Tianlian-2-06) नामक एक उन्नत डेटा रिले सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करना था। यह सैटेलाइट चीन के सेकंड-जनरेशन तियानलियान नेटवर्क का छठा हिस्सा है। इसे सरल भाषा में समझा जाए तो यह अंतरिक्ष में चीन का एक विशाल 'वाई-फाई और मोबाइल टावर' है। जिस तरह से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का TDRSS नेटवर्क काम करता है, चीन का यह सिस्टम ठीक उसी तरह की तकनीक पर आधारित है। यह सैटेलाइट चीनी अंतरिक्ष यात्रियों और स्पेस स्टेशन के लिए संचार की सबसे मजबूत कड़ी है, जो उन क्षेत्रों में भी डेटा और सिग्नल ट्रांसफर में मदद करता है जहां कोई ग्राउंड स्टेशन मौजूद नहीं होता।
बिजली रॉकेट के लिए क्यों होती है घातक?
आसमान से गिरने वाली बिजली में लाखों वोल्ट का करंट होता है, जो किसी भी उड़ते हुए रॉकेट के लिए विनाशकारी हो सकता है। जब बिजली रॉकेट से टकराती है, तो यह उसके भीतर मौजूद संवेदनशील कंप्यूटरों, जटिल नेविगेशन सिस्टम, सेंसर्स और फ्यूल टैंक के वाल्वों को तुरंत नष्ट कर सकती है। यदि नेविगेशन सिस्टम विफल हो जाए, तो रॉकेट अपना मार्ग भटक सकता है या हवा में ही दुर्घटनाग्रस्त होकर किसी आबादी वाले क्षेत्र पर गिर सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां खराब मौसम और बिजली चमकने की स्थिति में लॉन्च को तुरंत स्थगित कर देती हैं।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई घटना
अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में ऐसी घटनाएं बहुत कम देखने को मिली हैं जहां रॉकेट बिजली की मार झेलने के बाद भी अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंच गया हो। चीन का लॉन्ग मार्च-3बी अब उन चुनिंदा रॉकेट्स के क्लब में शामिल हो गया है जिन्होंने इस अग्निपरीक्षा को पार किया है। इससे पहले 1969 में NASA के मशहूर अपोलो 12 मिशन के दौरान सैटर्न 5 (Saturn V) रॉकेट पर उड़ान भरते ही दो बार बिजली गिरी थी, हालांकि उस समय रॉकेट का डेटा कुछ देर के लिए बाधित हो गया था। इसके अलावा रूस का सोयुज-2 (Soyuz-2) रॉकेट भी एक बार ऐसी ही स्थिति से सुरक्षित निकल चुका है।
चीन की टेक्नोलॉजी का बढ़ा कद
शिचांग के तूफानी मौसम में इस तरह की सफलता हासिल करना चीन की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है। पिछले दो सालों में चीन ने अपनी तियानलियान-2 सीरीज के चार सैटेलाइट लॉन्च करके अपने स्पेस कम्युनिकेशन ढांचे को काफी मजबूत किया है। इस हैरतअंगेज लॉन्च के बाद दुनिया भर के स्पेस एक्सपर्ट्स चीन के इस 'वर्कहॉर्स' रॉकेट की मजबूती और उसमें इस्तेमाल की गई सुरक्षा तकनीक की जमकर सराहना कर रहे हैं। इस घटना ने साबित कर दिया है कि चीन ने अपने रॉकेट्स की सुरक्षा और इंसुलेशन पर कितना अधिक काम किया है।
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