लखनऊ हाईकोर्ट परिसर का चौंकाने वाला मामला: वकील के चैंबर में चल रहा था मैरिज ब्यूरो, प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई

लखनऊ के कैसरबाग स्थित पुराने हाईकोर्ट परिसर में वकालत के चैंबर के अंदर मैरिज ब्यूरो चलाए जाने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए चैंबर को खाली करवा दिया है।

वकील के चैंबर में शादी का अड्डा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित पुराने हाईकोर्ट परिसर से एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। आमतौर पर वकीलों के चैंबर का उपयोग कानूनी सलाह, कागजी कार्यवाही और मुकदमों की तैयारी के लिए किया जाता है, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। एक वकील को आवंटित चैंबर का इस्तेमाल वकालत के बजाय शादियां करवाने के लिए एक मैरिज ब्यूरो के रूप में किया जा रहा था। जब यह मामला सामने आया तो कोर्ट ने इसे कानूनी गरिमा के साथ खिलवाड़ माना और इस पर कड़ी कार्रवाई की।

सुनवाई के दौरान खुला राज

यह पूरा प्रकरण तब सामने आया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई चल रही थी। उस समय पुलिस की ओर से अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की गई। रिपोर्ट को देखने के बाद न्यायाधीशों की टीम भी दंग रह गई। पुलिस द्वारा रिपोर्ट के साथ लगाए गए दस्तावेजों और सबूतों की जांच करने पर यह स्पष्ट हुआ कि पुराने हाईकोर्ट परिसर के चैंबर संख्या 31 का उपयोग कानून के काम के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक मैरिज ब्यूरो संचालित करने के लिए किया जा रहा था।

फूलों से सजा था कोर्ट का चैंबर

पुलिस की जांच रिपोर्ट में चैंबर की स्थिति का विवरण बेहद चौंकाने वाला था। रिपोर्ट के अनुसार, जिस चैंबर को कानूनी कार्यों के लिए आवंटित किया गया था, उसे किसी मैरिज हॉल की तरह सजा दिया गया था। चैंबर के प्रवेश द्वार पर बाकायदा तोरण द्वार लगाए गए थे और पूरे परिसर को फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया था। अदालत परिसर की पवित्रता और गरिमा के विपरीत हो रहे इस काम को देखकर हाईकोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। अदालत ने तत्काल प्रभाव से इस मामले को स्वतः संज्ञान यानी Suo Motu याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट प्रशासन की सख्त कार्रवाई

स्वतः संज्ञान लेने के बाद हाईकोर्ट ने प्रशासन को जमकर फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए। कोर्ट की नाराजगी के बाद हाईकोर्ट प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत को इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चैंबर संख्या 31 में जो अवैध विवाह केंद्र चलाया जा रहा था, उसे प्रशासन ने पूरी तरह से खाली करवा दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासन की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि आगे से ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होगी।

मामले का निस्तारण

हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई और चैंबर खाली कराए जाने की रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नजर आई। प्रशासन के जवाब के आधार पर हाईकोर्ट ने अपनी स्वतः संज्ञान याचिका को निस्तारित यानी Dispose कर दिया है। इस घटना की चर्चा न केवल शहर में बल्कि वकीलों के बीच भी जोर-शोर से हो रही है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि किस तरह से न्यायिक परिसर की मर्यादा को ताक पर रखकर ऐसा काम किया जा रहा था।

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