दिल्ली जंतर-मंतर पर वर्दी में इस्तीफा देने वाले सिपाही शेर सिंह का काला चिट्ठा आया सामने

उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह ने वर्दी में इस्तीफा देकर विवाद खड़ा किया है, लेकिन पुलिस विभाग ने उनके आपराधिक इतिहास का खुलासा कर दिया है।

वर्दी में इस्तीफे का ड्रामा और सच्चाई

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जहां उत्तराखंड पुलिस के एक सिपाही शेर सिंह ने अपनी वर्दी में ही इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इस दौरान वह छात्र नेता अभिजीत दीपके के साथ मंच साझा करते हुए देखे गए। शेर सिंह ने मंच से न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि एक उकसाने वाला भाषण भी दिया। हालांकि, इस घटना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने सिपाही के बारे में जो जानकारी साझा की है, उससे पूरा मामला पलट गया है।

आपराधिक मामलों में लिप्त है सिपाही

कुमाऊं क्षेत्र के आईजी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, शेर सिंह को कोई क्रांतिकारी नहीं माना जा सकता, बल्कि वह विभाग के लिए एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शेर सिंह का अतीत काफी विवादित रहा है। उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • संगठित अपराध में संलिप्तता।
  • जमीन कब्जाने जैसे गैर-कानूनी कामों में भागीदारी।
  • पहले से ही निलंबित चल रहे हैं।

सितंबर 2025 में जा चुके हैं जेल

पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, शेर सिंह का आपराधिक बैकग्राउंड काफी लंबा है। वह केवल अभी चर्चा में नहीं आए हैं, बल्कि अपनी करतूतों के चलते वह सितंबर 2025 में जेल भी जा चुके हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्दी पहनकर मंच से भाषण देने वाले इस सिपाही की छवि एक अपराधी की है और विभाग पहले ही उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुका है।

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