नीट विवाद और आशुतोष रांका का उदय
देश में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में बदलाव को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने कई नए चेहरों को सार्वजनिक पटल पर ला खड़ा किया है। इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। विशेष रूप से पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका का नाम चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ उनकी मुलाकात के बाद लोग उनकी शैक्षिक योग्यता और पृष्ठभूमि के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। यह लेख उनके सफर और उनके अब तक के करियर पर विस्तार से रोशनी डालता है।
सरकार के साथ बातचीत में भूमिका
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर लंबे समय से छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी कर रही है। जब सरकार ने इस मामले में छात्रों से बातचीत की पहल की, तो CJP के प्रतिनिधि के रूप में सौरव दास और आशुतोष रांका को आमंत्रित किया गया। इन दोनों ने केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष छात्रों की प्रमुख मांगों का ज्ञापन सौंपा और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस उच्च-स्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद ही आशुतोष रांका का नाम मीडिया की सुर्खियों में तेजी से उभरा।
आईआईटी कानपुर से शिक्षा की शुरुआत
आशुतोष रांका मूल रूप से राजस्थान के जयपुर शहर से ताल्लुक रखते हैं। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक, आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया। यहाँ से उन्होंने अपनी बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने के दौरान ही उनकी रुचि केवल तकनीकी या कोडिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे सार्वजनिक नीति, शासन प्रशासन और समाज में आने वाले बदलावों जैसे विषयों में भी गहरी दिलचस्पी लेने लगे थे। यह बौद्धिक झुकाव आगे चलकर उनके करियर का आधार बना।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मास्टर्स
बीटेक के बाद रांका ने अपनी उच्च शिक्षा को जारी रखने का फैसला किया और वे ब्रिटेन चले गए। वहां उन्होंने विश्व के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) से लोक प्रशासन यानी पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की। LSE को अर्थशास्त्र, शासन और वैश्विक नीति निर्माण के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी संस्थान माना जाता है। इस संस्थान में बिताए वर्षों के दौरान आशुतोष ने नीति निर्धारण की बारीकियों, सरकारी तंत्र के कामकाज और प्रशासनिक ढांचे को काफी करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया।
मैकेंजी एंड कंपनी में वैश्विक अनुभव
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आशुतोष रांका ने कॉरपोरेट जगत में कदम रखा। उन्होंने दुनिया की दिग्गज कंसल्टिंग फर्म मैकेंजी एंड कंपनी के साथ जुड़कर काम किया। वर्ष 2022 से 2024 के बीच वे इस कंपनी के साथ जुड़े रहे और उन्होंने कई ग्लोबल पॉलिसी व कंसल्टिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर अपनी सेवाएं दीं। इस अनुभव ने उन्हें न केवल वैश्विक स्तर की कार्यशैली से परिचित कराया, बल्कि उन्हें विभिन्न देशों की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों का बारीकी से अध्ययन करने का मौका भी दिया।
वर्तमान कार्य और राजनीतिक प्राथमिकताएं
मैकेंजी एंड कंपनी छोड़ने के बाद आशुतोष रांका वर्तमान में ग्लोबल हेल्थ से संबंधित एक महत्वपूर्ण संगठन में सीनियर एसोसिएट के तौर पर कार्यरत हैं। उनका मौजूदा कार्य स्वास्थ्य नीति, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर भी इन प्राथमिकताओं का उल्लेख मिलता है, जहां उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी सबसे बड़ी रुचि राजनीति और सार्वजनिक नीति में है। उनका मानना है कि भारत में बड़े स्तर पर बदलाव लाने के लिए बेहतर नीतियों और जवाबदेह शासन व्यवस्था का होना अनिवार्य है। यही अनुभव उन्हें छात्र आंदोलन में अन्य लोगों से अलग और अधिक रणनीतिक बनाता है।
कॉकरोच जनता पार्टी में जिम्मेदारी
जब कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों के हितों की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया, तो आशुतोष रांका ने पार्टी के साथ जुड़ने का निर्णय लिया। उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की अहम जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में वे लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, मीडिया चैनलों पर बहस में पार्टी का पक्ष रखने और सरकार के साथ होने वाली बैठकों में पूरी मजबूती के साथ अपनी बात रखने का काम कर रहे हैं। वे इस आंदोलन में न केवल एक चेहरा हैं, बल्कि संगठन और रणनीति बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
आंदोलन के प्रमुख चेहरे
इस पूरे घटनाक्रम में कॉकरोच जनता पार्टी के तीन चेहरे सबसे अधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं: पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, जो संगठन को वैचारिक नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं; दूसरे स्वतंत्र पत्रकार सौरव दास, जो पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में छात्रों की बात रख रहे हैं; और तीसरे आशुतोष रांका, जिन्होंने अपनी उच्च शैक्षणिक पृष्ठभूमि और वैश्विक अनुभव के जरिए इस आंदोलन को एक नई गंभीरता और दिशा देने का काम किया है। आईआईटी और LSE जैसी संस्थाओं से निकले युवाओं का इस तरह से छात्र आंदोलन से जुड़ना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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