गिरफ्तारी के बाद विधायक का बड़ा बयान
पालीगंज से विधायक संदीप सौरव को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपनी गिरफ्तारी के दौरान विधायक ने इसे पूरी तरह से गैर-कानूनी और तानाशाही करार दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह संघर्ष अभी थमा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक देश के नौजवानों का यह आंदोलन और अधिक तीव्र होगा।
संदीप सौरव ने आगे कहा कि NEET पेपर लीक मामले में जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवार को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। विधायक ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ कोई ठोस कानूनी कारण नहीं बताया गया है और पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया है।
पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
विधायक संदीप सौरव ने विस्तार से अपनी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके आवास से पुलिस द्वारा यह कहकर ले जाया गया था कि थाने में कुछ पूछताछ और बातचीत करनी है। हालांकि, उन्हें थाने ले जाने के बजाय सीधे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके जेल भेजा जा रहा है। विधायक ने इसे सरकार द्वारा नौजवानों के बढ़ते आक्रोश को दबाने की कोशिश बताया है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र समाप्त होने के दिन ही एक जन-प्रतिनिधि को इस तरह से उठा लेना सरकार की हताशा को दर्शाता है। सौरव के अनुसार, बिहार की राजधानी पटना में वर्तमान में कम से कम 3,000 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस रैंडम तरीके से किसी को भी उठाकर फर्जी मुकदमों में फंसा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा रोकने की कोशिश कर रहे थे, जिसके वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, फिर भी उन्हें गिरफ्तार किया गया।
आइसा अध्यक्ष धनंजय की कड़ी प्रतिक्रिया
इस गिरफ्तारी मामले में आइसा बिहार के अध्यक्ष धनंजय ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अब शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना भी अपराध बन गया है। धनंजय ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें जेल में डाल रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की दुखद घटनाओं के बाद 21 छात्रों की मौत हुई है, जिसे वे केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि सरकार की विफल नीतियों के कारण हुई हत्या मानते हैं।
धनंजय ने आगे कहा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाब देने में पूरी तरह नाकाम रही है। इसके उलट, वे आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र नेताओं को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार का यह अहंकार और हठ ज्यादा समय तक नहीं टिकने वाला है।
अन्य छात्र नेताओं पर भी कार्रवाई
इस दमनकारी कार्रवाई के दौरान केवल संदीप सौरव और धनंजय ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख छात्र नेताओं को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया है। मिली जानकारी के अनुसार:
- आइसा के राष्ट्रीय सचिव दीपांकर को सुबह ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
- पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेता सबा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है।
- इनके अलावा, कई दर्जन अन्य छात्रों को भी पुलिस ने हिरासत में रखकर पूछताछ की है।
अंत में, आइसा अध्यक्ष धनंजय ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य मंत्रियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार का युवा वर्ग इस अपमानजनक व्यवहार को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह गिरफ्तारी सरकार पर भारी पड़ेगी और आने वाले समय में छात्र आंदोलन को और अधिक मजबूती मिलेगी। संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेते हुए उन्होंने सभी साथियों को एकजुट रहने का संदेश दिया है।
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