जगदलपुर जेल में गूंजी शहनाई
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित केंद्रीय जेल में एक ऐसी शादी संपन्न हुई है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। यह मामला किसी फिल्म की कहानी की तरह है, जहां एक कैदी ने उसी युवती के साथ जीवनभर का साथ निभाने की कसम खाई, जिसने कभी उसके खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज कराई थी। जेल की चहारदीवारी के भीतर आयोजित इस विवाह समारोह में जेल प्रशासन ने ही बाराती की भूमिका निभाई। जेल परिसर को एक भव्य मंडप का रूप दिया गया था, जहां कैदी सुरेश सेठिया और उसकी प्रेमिका परिणय सूत्र में बंधे।
पेट्रोल पंप से शुरू हुई प्रेम कहानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेश सेठिया और युवती पहले एक पेट्रोल पंप पर सहकर्मी थे। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध पनपे और सुरेश ने युवती से विवाह का वादा भी किया था। हालांकि, दोनों अलग-अलग जाति के थे, जिसके चलते बाद में उनके संबंधों में खटास आ गई और सुरेश ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती ने सुरेश के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके चलते आरोपी को धारा 376 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सुरेश पिछले 7 महीने से जेल में अपनी सजा काट रहा था।
युवती ने क्यों दर्ज कराई थी शिकायत
दिलचस्प बात यह है कि जेल जाने के बाद भी युवती लगातार सुरेश से मिलने जेल आती रही। अपनी सफाई में युवती ने बताया कि पारिवारिक दबाव और परिजनों की नाराजगी के कारण उसने तत्कालीन परिस्थितियों में मजबूर होकर शिकायत दर्ज कराई थी। उसने स्पष्ट किया कि वह हमेशा से ही सुरेश के साथ रहना चाहती थी, लेकिन परिवार के विरोध ने उसे यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया था। जेल में मुलाकात के दौरान दोनों ने अपनी पुरानी गलतफहमियों को दूर किया और एक साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया।
अदालत और जेल प्रशासन की भूमिका
जब दोनों ने विवाह करने की इच्छा जताई, तो उन्होंने विधिवत रूप से जेल प्रबंधन के सामने अपनी बात रखी। जेल प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और दोनों की शादी के लिए अनुमति मांगी। अदालत ने दोनों आवेदकों के बालिग होने और बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से शादी करने की इच्छा जताने पर इस विवाह को मंजूरी दे दी। जेलर आर एस नेताम ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह अंतरजातीय विवाह संभव हो सका है।
जेल बनी विवाह स्थल
अधिवक्ता अवदेश झा ने इस कानूनी प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शादी करना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से सुरेश को प्रेम का झांसा देने के आरोप में जेल हुई थी, उसे बाद में अपनी गलती का एहसास हुआ और वह सुधार की राह पर है। अदालत ने भी दोनों पक्षों की सहमति को देखते हुए मानवीय आधार पर अनुमति प्रदान की। विवाह समारोह के दौरान एक वरिष्ठ आरक्षक ने दूल्हे की ओर से विवाह की रस्में पूरी करने में मदद की। इस मौके पर दुल्हन का परिवार और वकील भी उपस्थित थे। जगदलपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय बाद किसी कैदी की शादी देखने को मिली है, जिसे लेकर जेल प्रशासन ने सुरक्षा और आयोजन के तमाम इंतजाम किए थे।
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