समस्तीपुर के किसान ने साझा किया ग्राफ्टिंग का आसान तरीका, एक ही पेड़ पर मिलेंगी आम और अमरूद की कई वैरायटी

बरसात के मौसम में पेड़-पौधों पर कलम बांधने की तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है, जिससे किसान कम जगह में एक ही पौधे से विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त कर सकते हैं।

ग्राफ्टिंग तकनीक से बागवानी में नई क्रांति

बिहार के समस्तीपुर जिले के किसान संजीव ठाकुर ने बागवानी में रुचि रखने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही उपयोगी जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि आज के दौर में जब खेती के लिए जगह सीमित होती जा रही है, तब ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधने की तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। इस विधि के जरिए किसान और शौकिया बागवानी करने वाले लोग एक ही आम या अमरूद के पेड़ पर कई तरह की किस्में उगा सकते हैं।

बरसात का मौसम है सबसे उपयुक्त

संजीव ठाकुर बताते हैं कि कलम बांधने का काम करने के लिए बारिश का मौसम सबसे बेहतरीन समय माना जाता है। इस दौरान पौधों की वृद्धि दर काफी तेज होती है, जिसके कारण ग्राफ्टिंग के सफल होने की संभावना भी अन्य मौसमों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। बारिश के इस अनुकूल वातावरण में पौधे बहुत जल्द एक दूसरे के साथ ढल जाते हैं और नई कलमें तेजी से विकसित होने लगती हैं। जो लोग अपने बगीचे को कम लागत में अधिक उत्पादक और आकर्षक बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह समय नई किस्मों को आज़माने का एक सुनहरा अवसर है।

कलम बांधने की आसान विधि

अनुभवी किसान संजीव ठाकुर ने इस प्रक्रिया को बहुत ही सरल तरीके से समझाया है, जिसे कोई भी किसान या आम व्यक्ति आसानी से सीख सकता है:

  • सबसे पहले एक ऐसे स्वस्थ और मजबूत पौधे का चयन करें जिस पर आप ग्राफ्टिंग करना चाहते हैं।
  • पौधे की जिस टहनी पर आपको कलम लगानी है, वहां से सभी पत्तियों को सावधानीपूर्वक हटा दें।
  • अब उस टहनी को बीच में से अंग्रेजी के V आकार में ध्यान से काटें ताकि कलम को उसमें फिट किया जा सके।
  • उसी आकार की एक टहनी किसी दूसरी अच्छी किस्म के पौधे से लें और उसे भी V आकार में तैयार करें।
  • दोनों टहनियों को एक दूसरे के साथ पूरी तरह से जोड़ दें ताकि उनके जोड़ के बीच खाली जगह न रहे।
  • इस जुड़े हुए हिस्से को पारदर्शी प्लास्टिक या विशेष ग्राफ्टिंग टेप से बहुत अच्छी तरह बांधें।

यह ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि प्लास्टिक या टेप से बांधने का उद्देश्य जोड़ को पूरी तरह से सुरक्षित रखना है ताकि बारिश का पानी या बाहरी नमी अंदर न जा सके। यदि जोड़ के अंदर पानी चला गया, तो ग्राफ्टिंग के विफल होने का खतरा बना रहता है।

सावधानी और निगरानी का महत्व

संजीव ठाकुर का मानना है कि ग्राफ्टिंग कोई कठिन या जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं है, बस इसे करते समय थोड़ी सी सावधानी की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक दिनों में ग्राफ्टिंग किए गए हिस्से को मिट्टी या पानी के सीधे संपर्क से बचाना बहुत जरूरी है। जब जोड़ आपस में पूरी तरह से जुड़ जाते हैं, तो कुछ ही सप्ताह के भीतर वहां नई कोंपलें और टहनियां निकलने लगती हैं।

सीमित जगह में अधिक मुनाफा

इस तकनीक को अपनाने से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उन्हें एक ही प्रकार के फल के लिए अलग-अलग पौधे लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। छोटे बगीचे या खेत में भी एक ही पेड़ से कई तरह के आम या अमरूद प्राप्त किए जा सकते हैं। संजीव ठाकुर सलाह देते हैं कि ग्राफ्टिंग करते समय हमेशा साफ और धारदार औजारों का ही उपयोग करना चाहिए। जोड़ वाले हिस्से की नियमित रूप से निगरानी करते रहें और जब तक नई कोंपलें मजबूत न हो जाएं, तब तक प्लास्टिक को न हटाएं। अगर किसान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो उनकी मेहनत निश्चित रूप से सफल होगी और बगीचे की उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि होगी।

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