पेपर लीक पर सरकार सख्त, नया कानून तैयार
नीट पेपर लीक विवाद और दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी पूरी कर ली है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए प्रस्तावित कानून में पेपर लीक की घटनाओं पर बहुत तेजी से कार्रवाई करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में की जाएगी, ताकि 3 महीने के भीतर दोषियों को सजा सुनाई जा सके। प्रस्तावित कानून में सजा का प्रावधान बेहद कड़ा है, जिसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कैद हो सकती है। इसके साथ ही, भारी आर्थिक दंड के तौर पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी कड़ा प्रावधान रखा गया है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में चर्चा की जा रही है।
एक्शन मोड में केंद्र सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों से स्पष्ट है कि सरकार परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए अब कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सरकार का यह सख्त रुख उस समय और मुखर हुआ जब प्रदर्शनकारी छात्रों और भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक तक मंत्रियों ने पहुंचकर संवाद किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन को समाप्त कराने के लिए सरकार ने सीधे हस्तक्षेप किया। आधी रात के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सरकार की तरफ से आश्वासन दिया, जिसके बाद 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ा।
पीएम मोदी का कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर छात्रों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार पेपर लीक के मामले में बेहद गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एक ऐसा कठोर कानून ला रही है, जो विशेष रूप से पेपर लीक करने वालों की कमर तोड़ेगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस कानून का मसौदा कैबिनेट में रखा गया है और सरकार की प्राथमिकता इसे अगले सप्ताह संसद से पारित कराने की है।
सोनम वांगचुक की मांगों पर सरकार का रुख
सरकारी मंत्रियों के साथ हुई मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। सरकार ने उन्हें आश्वस्त किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही, सरकार ने सोनम वांगचुक द्वारा रखी गई अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार करने का वादा किया है। कानून के लागू होते ही परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव आने की उम्मीद है।
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