पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोरी के आरोप में दो मोटर वाहन निरीक्षक निलंबित, मुख्यमंत्री ने दी कड़ी चेतावनी

पश्चिम बंगाल सरकार ने पश्चिम बर्धमान के रामपुर चेकपोस्ट पर ट्रक चालक से अवैध रूप से 22,000 रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' पर जोर देते हुए एंटी-करप्शन ब्यूरो को मामले की जांच सौंप दी है।

रिश्वतखोरी के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक सुचिता और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी शून्य सहिष्णुता की नीति को रेखांकित करते हुए सरकार ने दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की सख्त कार्रवाई की है। यह पूरा मामला पश्चिम बर्धमान के रामपुर चेकपोस्ट से जुड़ा हुआ है, जहां तैनात दो मोटर वाहन निरीक्षकों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सामान ले जा रहे एक ट्रक के ड्राइवर को न केवल अनुचित रूप से परेशान किया, बल्कि उससे गैर-कानूनी ढंग से भारी-भरकम रिश्वत भी मांगी।

इस मामले की शिकायत मिलने के तुरंत बाद राज्य के परिवहन विभाग ने बहुत तेजी से काम किया और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। चेकपोस्ट के अधिकारियों द्वारा गाड़ी को जबरन रोके जाने और उसे अवैध रूप से जब्त करने की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह का दुर्व्यवहार, जबरन वसूली या आम जनता का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर इस कार्रवाई के बारे में जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने दोहराई 'जीरो टॉलरेंस' की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि पश्चिम बंगाल सरकार प्रशासन, विभाग या सरकार के किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह से 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' अपनाती है। जबरन वसूली और रिश्वतखोरी को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह से साफ-सुथरा बनाने और भ्रष्ट तत्वों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए पूरी तरह से संकल्पबद्ध है।

अपने बयान में मुख्यमंत्री ने घटना के पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से एक सामान्य ट्रांसपोर्टर को प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों प्रताड़ित होना पड़ा। उन्होंने लिखा कि ट्रक संख्या JH09BA3535 अपनी नियमित सर्विसिंग कराने के बाद वापस गैराज की तरफ लौट रहा था। इसी दौरान पश्चिम बर्धमान के रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात अधिकारियों ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर उसे जबरदस्ती रोक लिया।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ट्रक के चालक शिवा यादव को अधिकारियों द्वारा गैर-कानूनी तरीके से परेशान किया गया और उन पर रिश्वत देने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। जब ड्राइवर ने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो अधिकारियों ने उनकी गाड़ी को जब्त कर लिया। इसके बाद अधिकारियों ने एक ऐसे टैक्स के भुगतान के रूप में ₹22,000 की अवैध मांग की, जिसे राज्य सरकार द्वारा पहले ही पूरी तरह से खत्म किया जा चुका था।

दोषी मोटर वाहन निरीक्षकों पर गिरी गाज, मामला एंटी-करप्शन ब्यूरो को सौंपा

व्यावसायिक वाहनों के चालकों को इस तरह के उत्पीड़न से बचाने के लिए उठाए गए त्वरित विभागीय कदमों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जबरन वसूली और सत्ता के दुरुपयोग की शिकायतों पर परिवहन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रशासनिक कदाचार के प्रति राज्य सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की गई है।

रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात और इस वसूली कांड के दोषी मोटर वाहन निरीक्षकों नाजिमुल हक और अनुपम बनर्जी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह निलंबन आदेश पश्चिम बंगाल सेवा नियम, 1971 के नियम 7(1)(a) के तहत जारी किया गया है। विभाग ने इस मामले को केवल विभागीय स्तर तक ही सीमित नहीं रखा है। मिली शिकायतों को औपचारिक रूप से एंटी-करप्शन ब्यूरो को सौंप दिया गया है, ताकि मामले की गहन आपराधिक जांच की जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

सभी विभागों के लिए सख्त चेतावनी और निर्देश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के सभी प्रशासनिक विभागों और अधिकारियों को एक बहुत ही स्पष्ट और कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि जो भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी गैर-कानूनी तरीके से धन उगाही या जबरन वसूली जैसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाएगा, उसे बेहद गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

इस घटना के बाद परिवहन क्षेत्र में सुधार के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश लागू किए जा रहे हैं कि जिन गाड़ियों को गलत या गैर-कानूनी तरीके से रोका गया है, उन्हें तुरंत छोड़ा जाए। ट्रांसपोर्टरों और वाणिज्यिक वाहनों के चालकों के उत्पीड़न से निपटने के लिए बेहद कड़े कानून और नियम लागू किए जाएंगे। सरकार का एकमात्र लक्ष्य राज्य में एक पारदर्शी, निष्पक्ष, जन-हितैषी और पूरी तरह से भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है।

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