मुंबई के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसले में ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट और उससे जुड़े विक्रेता को एक ग्राहक को 1.81 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का फरमान सुनाया है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब मुंबई निवासी एक ग्राहक ने ऑनलाइन माध्यम से Apple iPhone 14 Pro का ऑर्डर दिया, लेकिन जब उसने पार्सल की अनबॉक्सिंग की, तो अंदर स्मार्टफोन के स्थान पर केवल दाढ़ी बढ़ाने का तेल और कुछ पैकिंग का सामान मिला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अतिरिक्त पीठ ने अपने हालिया आदेश में इस घटना को अनुचित व्यापारिक व्यवहार (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) करार देते हुए कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
ई-कॉमर्स कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी ई-कॉमर्स मंच केवल सामान बिकवाकर अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता। चूँकि ग्राहक ने ऑनलाइन भुगतान के साथ ऑर्डर बुक किया था, इसलिए फ्लिपकार्ट की यह बुनियादी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी थी कि उसे वही उत्पाद मिले जो उसने चुना था। कोर्ट ने कहा कि ग्राहकों की शिकायतों को बिना किसी ठोस या सार्थक समाधान के बार-बार बंद कर देना सेवा में बड़ी खामी है। कंपनी का यह कृत्य उपभोक्ता के विश्वास को तोड़ने वाला है और ऐसे मामलों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते, विशेषकर तब जब ग्राहक द्वारा गलत उत्पाद मिलने की सूचना तुरंत दे दी गई हो।
फ्लिपकार्ट और विक्रेता दोनों पर गिरी गाज
उपभोक्ता आयोग ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए फ्लिपकार्ट और संबंधित विक्रेता, इंटरनेशनल वैल्यू रिटेल प्राइवेट लिमिटेड, दोनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है। आयोग के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले की सही ढंग से जांच न करना, गलत डिलीवर किए गए पार्सल को वापस लेने में विफल रहना, न तो नया फोन उपलब्ध कराना और न ही पैसे वापस करना सेवा में स्पष्ट कमी को दर्शाता है। विक्रेता ने भी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया, इसलिए हर्जाना भरने की जिम्मेदारी दोनों की बनती है।
क्या था पूरा मामला और कैसे हुई धोखाधड़ी
मिली जानकारी के अनुसार, पवई क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने 22 अप्रैल 2023 को फ्लिपकार्ट के माध्यम से 1,11,793 रुपये की कीमत में 128 GB वाला Apple iPhone 14 Pro बुक किया था। इस खरीदारी के लिए उसने नो-कॉस्ट ईएमआई योजना का चयन किया था। हालांकि, उसी ऑर्डर के तहत मंगाए गए अन्य सामान जैसे कि चार्जर और कवर तो उसे सही सलामत मिल गए, लेकिन अगले दिन जब मुख्य पार्सल उसके पास पहुँचा, तो उसमें आईफोन के बजाय दाढ़ी बढ़ाने का तेल निकला। पीड़ित ग्राहक ने अप्रैल 2023 से मई 2023 के बीच कंपनी के कस्टमर सपोर्ट से दर्जनों बार संपर्क किया और कंपनी द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए, लेकिन फ्लिपकार्ट ने न तो उत्पाद बदला और न ही रकम लौटाई।
45 दिनों में भुगतान का कड़ा निर्देश
आयोग ने अपने आदेश में फ्लिपकार्ट और विक्रेता को निर्देशित किया है कि वे ग्राहक को 1,11,793 रुपये की मूल राशि, 22 अप्रैल 2023 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं। इसके अतिरिक्त, ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना और हुई परेशानी के लिए 50,000 रुपये और कानूनी मुकदमे के खर्च के रूप में 20,000 रुपये का भुगतान करना होगा। आयोग ने इन सभी राशियों का भुगतान आगामी 45 दिनों की समय सीमा के भीतर करने का निर्देश दिया है।
एपल इंडिया को मिली बड़ी राहत
इस कानूनी लड़ाई के दौरान Apple India ने भी अपना पक्ष रखा। कंपनी ने कोर्ट को बताया कि वह अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्वतंत्र डीलरों और विक्रेताओं पर निर्भर है, इसलिए डिलीवरी या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता। आयोग ने इस दलील को आधार मानते हुए Apple India के खिलाफ की गई शिकायत को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि यह पूरा विवाद गलत उत्पाद की डिलीवरी से संबंधित है और ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि पैकिंग या पार्सल भेजने की प्रक्रिया में निर्माता कंपनी की कोई भूमिका या कमी थी।
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