ईरान के खिलाफ अमेरिका का कड़ा रुख
मनीला में एक प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान को उसके आक्रामक व्यवहार का भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। रुबियो ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति महज एक सामान्य प्रतिशोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'आंख के बदले सिर' लेने जैसी निर्णायक कार्रवाई पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लगातार समझौतों का उल्लंघन कर रहा है और जब तक तेहरान ईमानदारी से बातचीत की मेज पर नहीं आता, अमेरिका का दबाव लगातार बना रहेगा। रुबियो के दावों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के चलते ईरान को अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है।
ईरान को चुकानी होगी भारी कीमत
रुबियो से पत्रकारों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों के बाद अमेरिका ईरान के नागरिक ढांचे, जैसे कि पुल या बिजली संयंत्रों पर हमला करने की संभावना पर विचार कर रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रुबियो ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने 'आंख के बदले आंख' की नीति की बात कही थी। रुबियो ने इसे खारिज करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि ट्रंप प्रशासन की नीति उस से कहीं अधिक गंभीर है और ईरान को अब अपने हर कदम के लिए बहुत बड़ी कीमत अदा करनी होगी।
अर्थव्यवस्था और रक्षा तंत्र पर गहरा असर
अमेरिकी विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरान का सैन्य और औद्योगिक बुनियादी ढांचा लगभग तबाह हो चुका है। उनके मुताबिक, ईरान की मिसाइल लॉन्चर इकाइयां और रडार सिस्टम लगातार नष्ट हो रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान गंभीर संकट से जूझ रहा है और उसे भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। रुबियो ने यह भी जोड़ा कि ईरानी सरकार अपने आंतरिक मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगाती है, जिसके कारण वहां की वास्तविक स्थिति दुनिया के सामने नहीं आ पाती। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि ईरान पर्दे के पीछे से अन्य देशों के माध्यम से अमेरिका को संदेश भेजकर समझौते की गुहार लगा रहा है।
समझौते के दावों पर अविश्वास
रुबियो ने ईरान के नेतृत्व पर भरोसे की कमी जताते हुए कहा कि अतीत में ईरान ने हर समझौते का या तो उल्लंघन किया है या फिर उसकी शर्तों को बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने ईरान के तीखे बयानों और सोशल मीडिया पर किए जा रहे प्रचार को दिखावा करार दिया। रुबियो का मानना है कि ईरान वास्तव में बहुत नाजुक स्थिति में है और जल्द ही उसे बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि नुकसान का स्तर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपना रुख नहीं बदला, तो उसे और भी अधिक सैन्य और आर्थिक विनाश झेलना पड़ेगा।
क्षेत्रीय तनाव और सैन्य कार्रवाई की चर्चा
इस बीच, ईरान की सेना और IRGC ने दावा किया है कि उन्होंने कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। ईरानी दावों के अनुसार, इन हमलों में अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम और रसद केंद्र नष्ट हुए हैं। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के विरुद्ध एक बड़े सैन्य अभियान की योजना पर विचार कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक, यह संभावित हमला इस साल हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' से भी अधिक व्यापक हो सकता है। ट्रंप ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह बड़े हमले के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और जल्द ही इस पर निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, रिपोर्टों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेना को अभी तक किसी नए ऑपरेशन का अंतिम आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और इस मुद्दे पर मंथन अभी जारी है।
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