बारिश के मौसम में मशरूम की खेती से होगी बंपर कमाई, सिर्फ 45 दिन में तैयार होगी फसल

अगर आप कम लागत में खेती से मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो बारिश का मौसम आपके लिए बेहतरीन अवसर है। ऑयस्टर मशरूम की खेती का बिजनेस मॉडल अपनाकर किसान और युवा कम समय में अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

मशरूम की खेती से बदलेगी आपकी तकदीर

खेती के पारंपरिक तरीकों से हटकर अगर आप कुछ नया और मुनाफे वाला काम करना चाहते हैं, तो ऑयस्टर मशरूम की खेती आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। आम तौर पर लोगों के बीच यह धारणा है कि मशरूम सिर्फ सर्दियों में उगने वाली फसल है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ यानी बारिश का मौसम इसके उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल होता है। जुलाई के महीने में वातावरण में 80 से 90 प्रतिशत तक प्राकृतिक नमी मौजूद रहती है, जो मशरूम के विकास के लिए जादुई मानी जाती है।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह

सतना के सोहावल विकासखंड में उद्यान विकास अधिकारी सुधा पटेल के अनुसार, बारिश के दिनों में ऑयस्टर मशरूम की खेती करना न केवल आसान है बल्कि आर्थिक रूप से बहुत लाभदायक भी है। इस दौरान बाजार में मशरूम की मांग बनी रहती है और अच्छी कीमत भी मिलती है। यदि कमरे के भीतर तापमान अधिक महसूस हो, तो आप खिड़कियों पर गीली बोरियां टांगकर या फर्श पर पानी छिड़ककर इसे संतुलित कर सकते हैं। सही नमी मिलने से कवक जाल यानी माइसीलियम तेजी से फैलता है, जिससे फसल का उत्पादन कहीं अधिक बढ़ जाता है।

खेती की प्रक्रिया और तैयारी

मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का भूसा या धान के पुआल का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खेती शुरू करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना अनिवार्य है:

  • सबसे पहले भूसे को फॉर्मेलिन और बाविस्टिन के घोल से अच्छी तरह उपचारित करें, ताकि बरसात के समय फंगस का खतरा न रहे।
  • उपचारित भूसे में लगभग 10 से 12 प्रतिशत की दर से ऑयस्टर स्पॉन यानी बीज मिलाएं।
  • इस मिश्रण को पीपी बैग में भरकर छोटे-छोटे छेद कर दें, ताकि बैग के अंदर हवा का संचार बना रहे।
  • इन बैग्स को करीब 15 दिनों तक किसी अंधेरे कमरे में रखा जाना चाहिए।
  • जब बैग का भूसा पूरी तरह सफेद दिखाई देने लगे, तो प्लास्टिक हटा दें और दिन में दो से तीन बार पानी का हल्का स्प्रे करें।

पैदावार का पूरा चक्र

ऑयस्टर मशरूम की फसल का पूरा चक्र केवल 40 से 45 दिन का होता है। प्रक्रिया के पहले 15 से 18 दिन बैग के भीतर कवक जाल फैलने में लगते हैं। इसके तुरंत बाद नन्हे मशरूम दिखाई देने लगते हैं और अगले तीन से चार दिन में ही वे कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। अच्छी बात यह है कि एक बैग से केवल एक बार नहीं, बल्कि दूसरी और तीसरी बार भी फसल ली जा सकती है। यदि आप एक किलो सूखा भूसा इस्तेमाल करते हैं, तो उससे लगभग 800 ग्राम से एक किलो तक ताजा और शुद्ध मशरूम आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

कैसे बनाएं इसे एक सफल बिजनेस

सिर्फ मंडियों तक सीमित रहने से कमाई सीमित रह जाती है। इसे एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदलने के लिए आपको अपनी मार्केटिंग रणनीति पर ध्यान देना होगा:

  • सीधी बिक्री: ताजा मशरूम को छोटे पैकेट में पैक करें और सीधे स्थानीय होटलों, रेस्टोरेंट्स, जिम जाने वाले लोगों और सुपरमार्केट्स में बेचें।
  • वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स: यदि फसल की तुरंत बिक्री नहीं हो पा रही है, तो मशरूम को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, जिसे कई महीनों तक स्टोर किया जा सकता है। इसके अलावा मशरूम से अचार, पापड़, बिस्कुट और नमकीन जैसे उत्पाद बनाकर अपनी ब्रांडिंग करें।
  • अतिरिक्त आय के स्रोत: फसल खत्म होने के बाद जो भूसा और बैग बचते हैं, उन्हें जैविक खाद के रूप में बेचा जा सकता है। साथ ही आप नए किसानों को मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग देकर या ऑनलाइन माध्यमों से स्पॉन सप्लाई करके भी अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं।

इस प्रकार, सही योजना और मेहनत के साथ मशरूम की खेती केवल एक मौसमी फसल नहीं, बल्कि साल भर चलने वाला एक शानदार बिजनेस मॉडल साबित हो सकती है। यदि आप छोटे स्तर से भी इसकी शुरुआत करते हैं, तो थोड़े समय के भीतर ही बाजार में अपनी एक अलग पहचान और स्थाई ग्राहक आधार तैयार कर सकते हैं।

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