23 साल से दाढ़ी नहीं कटवाई, एक्टर बनने छोड़ी बैंक की नौकरी; अब पंचर की दुकान पर काट रहे जीवन

मध्य प्रदेश के सागर जिले के निवासी बाबू मिश्रा अपनी लंबी दाढ़ी और संघर्षपूर्ण जीवन के लिए चर्चा में हैं। कभी फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमाने का सपना देखने वाले बाबू मिश्रा अब पंचर की दुकान चलाकर अपना गुजारा कर रहे हैं।

सागर के दाढ़ी वाले बाबू की अनोखी कहानी

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक ऐसे शख्स रहते हैं, जिन्हें पूरा शहर दाढ़ी वाले बाबू के नाम से जानता है। बाबू मिश्रा नाम के इस व्यक्ति ने पिछले 23 साल से अपनी दाढ़ी नहीं कटवाई है। यह केवल एक शौक नहीं है, बल्कि उनके जीवन के उतार-चढ़ाव और संघर्षों का एक प्रतीक बन चुका है। वह अपनी दाढ़ी की देखभाल के लिए बेहद सतर्क रहते हैं और आज भी इसे पूरी तरह मेंटेन करके रखते हैं।

बैंक की नौकरी और मुंबई का सपना

बाबू मिश्रा का सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सेंट्रल बैंक में एक कर्मचारी के रूप में की थी। वह बंडा में बैंक में तैनात थे, लेकिन वहां के मैनेजर के साथ हुए एक विवाद के कारण उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उनके मन में फिल्मों में हीरो बनने का सपना पलने लगा। साल 1986 की बात है, जब उनके पास कुल 10000 रुपये जमा थे। इन्हीं पैसों के सहारे वह अभिनय की दुनिया में किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए। मुंबई में उनके बड़े भाई पहले से रहते थे, जिन्होंने शुरुआत के डेढ़ महीने तक उनका सहयोग किया, लेकिन बाद में उन्हें घर से निकाल दिया गया।

फुटपाथ का जीवन और कठिन संघर्ष

मुंबई में संघर्ष के दिनों में बाबू मिश्रा को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्हें 8 दिन तक केवल चने खाकर फुटपाथ पर रातें गुजारनी पड़ी थीं। इसके बाद उन्हें एक गोदाम में काम मिला, जहां उन्हें 600 रुपये महीने का वेतन मिलता था। मुंबई में उन्होंने पूरे 8 साल बिताए। आर्थिक तंगी के कारण वह पैसे बचाने के लिए दिन भर में केवल एक बार ही खाना खाते थे। बाबू मिश्रा बताते हैं कि आज 66 साल की उम्र में भी उनकी यही आदत बरकरार है और वह 24 घंटे में केवल एक बार, यानी रात के समय ही भोजन करते हैं।

वापसी और पंचर की दुकान

अपने सपने को पूरा न हो पाने के बाद, साल 1998 में बाबू मिश्रा वापस अपने शहर सागर लौट आए। यहां उन्होंने कुछ अन्य काम करने की कोशिश की, लेकिन उन सभी में उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। अंत में उन्होंने एक पंचर की दुकान शुरू की, जो धीरे-धीरे चल पड़ी। बाबू मिश्रा के अनुसार, उन्होंने शुरुआत में पैसों की बचत करने के चक्कर में दाढ़ी कटवाना बंद किया था, लेकिन बाद में यही उनकी पहचान बन गई और उन्होंने इसे बरकरार रखा।

पिता की मृत्यु के बाद बदला जीवन

अपनी दाढ़ी के बारे में बात करते हुए बाबू मिश्रा बताते हैं कि साल 2003 में उनके पिता का देहांत हुआ था, तब उन्होंने आखिरी बार अपनी दाढ़ी बनवाई थी। उसके बाद से उन्होंने कभी इसे नहीं कटवाया। वह नियमित रूप से अपनी दाढ़ी की सेवा करते हैं। वह बताते हैं कि पहले वह इसे काली मिट्टी और छाछ से धोते थे, लेकिन पिछले दो-तीन साल से अब वह इसके लिए बाजार में मिलने वाले शैम्पू का ही इस्तेमाल करते हैं। आज पूरे सागर शहर में लोग उन्हें उनकी लंबी दाढ़ी की वजह से ही पहचानते हैं।

ग्राहकों के लिए अनोखे ऑफर्स

बाबू मिश्रा अपनी दाढ़ी के अलावा अपने कपड़ों के स्टाइल के लिए भी चर्चा में रहते हैं। उन्होंने अपनी शर्ट में 5 जेब बनवा रखी हैं। इसके अलावा, वह अपनी पंचर और ऑटो पार्ट्स की दुकान पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए खास ऑफर भी चलाते हैं। उनके दुकान के नियम के अनुसार, यदि कोई ग्राहक अपनी दुपहिया या चौपहिया गाड़ी में 500 रुपये का काम करवाता है, तो उसे गाड़ी की सर्विसिंग बिल्कुल मुफ्त में दी जाती है। बाबू मिश्रा की यह सादगी और मेहनत आज सागर में कई लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

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