भोपाल मेट्रो के विस्तार की बड़ी खबर
भोपाल वासियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। शहर की लाइफलाइन बनने की राह पर अग्रसर भोपाल मेट्रो के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मेट्रो के अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी यानी CMRS द्वारा आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी गई है। इस मंजूरी के बाद अब भोपाल मेट्रो का परिचालन नए स्तर पर पहुंच जाएगा। इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद अब मेट्रो दोनों ट्रैक्स पर दौड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिससे आम जनता को आवागमन में पहले से अधिक सहूलियत मिलेगी।
25 जुलाई से अमल में आएगा नया रूट प्लान
मेट्रो प्रशासन ने इस तकनीकी मंजूरी के बाद एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रशासन के अनुसार, आगामी 25 जुलाई से शहर में मेट्रो का नया रूट प्लान प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। अब तक मेट्रो का परिचालन एक सीमित और नियंत्रित दायरे में ही हो पा रहा था, जिसके कारण यात्रियों को उस स्तर पर लाभ नहीं मिल पा रहा था जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। हालांकि, अब इस नए बदलाव के साथ शहरवासियों को मेट्रो सेवा का वास्तविक और पूर्ण लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
दोनों ट्रैक्स पर मेट्रो का परिचालन
इस नई व्यवस्था की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि अब मेट्रो केवल एक ट्रैक पर ही निर्भर नहीं रहेगी। नए सिग्नलिंग सिस्टम के सफलतापूर्वक सक्रिय होने के बाद मेट्रो अप और डाउन, दोनों ही दिशाओं के ट्रैक्स पर अपनी पूरी रफ्तार के साथ दौड़ सकेगी। बीते समय में एक ही ट्रेन से आने और जाने की प्रक्रिया संपन्न की जाती थी, जिस कारण यात्रियों को अगली मेट्रो के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब दोनों ट्रैक्स के चालू होने से इंतजार की यह समस्या पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी और आवाजाही सुगम हो जाएगी।
पीक ऑवर्स में हर 15 मिनट में मिलेगी मेट्रो
यात्रियों की सुविधा को केंद्र में रखते हुए मेट्रो के टाइम टेबल में भी व्यापक सुधार किए गए हैं। दफ्तर, स्कूल और कॉलेज जाने वाले लोगों के लिए सबसे व्यस्त समय यानी पीक ऑवर्स के दौरान मेट्रो की उपलब्धता में वृद्धि की गई है। अब व्यस्त समय में यात्रियों को हर 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। इस कदम से यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी और उन्हें स्टेशनों पर लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। पीक ऑवर्स के अलावा सामान्य समय के दौरान मेट्रो सेवा हर 30 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध रहेगी।
सुरक्षा मानकों की गहन जांच
यह महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने से पहले, पिछले महीने 25 जून को CMRS की टीम ने ट्रैक का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान निरीक्षण के लिए दो अलग-अलग टीमों ने दो अलग-अलग मेट्रो ट्रेनों में सवार होकर सिस्टम की बारीकियों को परखा था। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि दो मेट्रो ट्रेनें किसी कारणवश आमने-सामने आ जाएं, तो उनका सिग्नलिंग सिस्टम किस प्रकार प्रतिक्रिया देगा। इस दौरान सुरक्षा से जुड़े कई तकनीकी बिंदुओं और पहलुओं की गहन जांच की गई, जिसके संतोषजनक परिणामों के बाद ही यह हरी झंडी दी गई है। भोपाल मेट्रो का यह नया स्वरूप निश्चित रूप से शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने के साथ ही नागरिकों को सुरक्षित और आधुनिक सफर का अनुभव प्रदान करेगा।
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