जोधपुर: 60 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन, 70 बटुकों ने विधि-विधान से धारण किया जनेऊ

जोधपुर में पिछले 60 वर्षों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक भव्य उपनयन संस्कार का आयोजन किया गया, जिसमें 70 बालकों ने जनेऊ धारण कर वैदिक संस्कृति का संकल्प लिया।

परंपरा और निष्ठा का संगम

राजस्थान के जोधपुर में सनातन संस्कृति के संरक्षण की एक मिसाल देखने को मिली। यहां पिछले 60 वर्षों से अनवरत चली आ रही एक अनूठी परंपरा के तहत इस बार भी भव्य यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ। इस पवित्र आयोजन में 70 बटुकों ने भाग लिया और पूरे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जनेऊ धारण किया।

धार्मिक विधि-विधान और महत्व

आचार्यों और विद्वान ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में यह उपनयन संस्कार पूरी धार्मिक मर्यादा के साथ पूर्ण हुआ। यज्ञोपवीत संस्कार को सनातन धर्म के सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण सोपान माना गया है। यह संस्कार न केवल बालक के जीवन में अनुशासन और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि यह उसके आध्यात्मिक जीवन की पहली सीढ़ी भी माना जाता है।

नई पीढ़ी और संस्कृति का जुड़ाव

आयोजकों का मानना है कि दशकों पुरानी इस परंपरा को जीवित रखने का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़े रखना है। वर्तमान समय में जब आधुनिकता की होड़ मची है, तब इस तरह के आयोजनों के माध्यम से बच्चों को वैदिक मूल्यों, धार्मिक संस्कारों और नैतिक शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और बटुकों के परिजन उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अनुष्ठान को पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न होते देखा। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी परंपराएं ही समाज को अपनी धरोहर से जोड़े रखने का कार्य करती हैं।

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