मानसून और धान की फसल का संकट
मॉनसून के दौरान लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते खेतों में पानी का जमाव एक गंभीर समस्या बन गई है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो धान के खेतों में पानी का भरा रहना फसल के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। यह जलजमाव एक ऐसी खतरनाक बीमारी को जन्म देता है, जो लहलहाती फसल को कुछ ही दिनों में सुखाकर भूसा बनाने की क्षमता रखती है। विशेष रूप से पश्चिम चम्पारण जैसे बाढ़ की चपेट में रहने वाले क्षेत्रों में इस रोग का प्रकोप तेजी से देखा जा रहा है। वहां के कई किसानों ने अपनी धान की फसल में काले धब्बे और फंगस की शिकायत की है, जिसे तकनीकी भाषा में ब्लास्ट डिजीज कहा जाता है। यह रोग धान की कुल पैदावार को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।
ब्लास्ट डिजीज क्या है और क्यों फैलता है
जिले के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ के अनुसार, फंगस एक प्रकार की फफूंद है जो अत्यधिक नमी और खेतों में पानी के ठहराव के कारण पनपती है। यह धान के पौधों पर बहुत तेजी से हमला करती है। इस रोग के लक्षण फसल के तनों, पत्तियों और दानों पर स्पष्ट रूप से काले धब्बों के रूप में नजर आते हैं। इन धब्बों के कारण पौधे अंदर से कमजोर हो जाते हैं और अंत में सड़ने लगते हैं, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
बिना खर्च के देसी इलाज
किसानों के लिए राहत की बात यह है कि इस रोग से निपटने के लिए महंगे रसायनों के बजाय घरेलू और देसी तरीकों का उपयोग किया जा सकता है। नीम का रस एक प्राकृतिक और शक्तिशाली फंगसरोधी औषधि के रूप में काम करता है। किसान नीम की ताजी पत्तियों को पानी में उबालकर उसका अर्क तैयार कर सकते हैं। इस घोल का फसल पर छिड़काव करने से फंगस के फैलाव को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
छाछ और बेकिंग सोडा का जादुई असर
कृषि के जानकार और बनकट मुसहरी के प्रगतिशील किसान रविकांत पांडे बताते हैं कि छाछ यानी मट्ठा का उपयोग फफूंद नाशक के रूप में करना बेहद सफल रहा है। छाछ में मौजूद विशिष्ट बैक्टीरिया फफूंद की गतिविधियों को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित बनी रहती है। इसका सही उपयोग करने के लिए 10 लीटर पानी में 2 लीटर छाछ को अच्छी तरह मिलाकर पौधों पर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा, एक अन्य कारगर नुस्खे के तहत 1 चम्मच बेकिंग सोडा को 1 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने से भी फंगस पर लगाम लगाई जा सकती है। यह घोल पत्तियों पर मौजूद काले धब्बों को साफ करने और संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने में बहुत उपयोगी है।
फसल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी निर्देश
सिर्फ छिड़काव ही काफी नहीं है, बल्कि किसानों को कुछ अन्य सावधानियों का भी पालन करना अनिवार्य है ताकि धान की फसल को स्वस्थ रखा जा सके। फसल सुरक्षा के लिए निम्न बातों पर गौर करें:
- खेत में यदि कुछ पौधे फंगस से संक्रमित दिखें, तो उन्हें तुरंत उखाड़कर फसल से दूर नष्ट कर दें।
- खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि लंबे समय तक पानी न जमा रहे।
- मिट्टी के स्वास्थ्य पर नजर रखें और पौधों में संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत उपचार शुरू करें।
इन आसान और किफायती तरीकों को अपनाकर किसान बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपनी धान की फसल को ब्लास्ट रोग से बचा सकते हैं और बेहतर पैदावार सुनिश्चित कर सकते हैं।
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