पैरोल जंप कर फरार हुआ अपराधी
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ट्रिपल मर्डर के अपराधी ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी। गुना का रहने वाला कुख्यात अपराधी हनी दुबे, जो अपनी मां पूनम दुबे के साथ मिलकर जघन्य अपराधों के लिए जेल में सजा काट रहा था, पैरोल की शर्तों का उल्लंघन कर फरार हो गया था। इस महीने की शुरुआत में, यानी 6 जुलाई को मां और बेटे दोनों को 15 दिन की पैरोल पर जेल से रिहा किया गया था। नियमों के अनुसार, उन्हें 22 जुलाई को वापस ग्वालियर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना था। तय समय पर पूनम दुबे तो जेल लौट आई, लेकिन हनी दुबे ने पैरोल जंप कर लिया और पुलिस को चकमा देकर गायब हो गया।
पुलिस को 24 घंटे में दो बार दी मात
हनी दुबे की तलाश में जुटी ग्वालियर पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद उसे उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से खोज निकाला। पुलिस टीम उसे गिरफ्तार करके ग्वालियर वापस ला रही थी, ताकि उसे दोबारा जेल भेजा जा सके। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब बहोड़ापुर थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर वह पुलिस की गिरफ्त से छूटकर भाग निकला। यह घटना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई, क्योंकि आरोपी ने महज 24 घंटे के भीतर ही पुलिस को दो बार चकमा देकर उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
चार घंटे तक चला सर्च ऑपरेशन
आरोपी के दोबारा फरार होने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से बहोड़ापुर और आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर दी और आरोपी को दबोचने के लिए गुप्त मुखबिरों का जाल बिछाया गया। बताया जा रहा है कि हाथरस से ग्वालियर लाने के दौरान गाड़ी से उतरते वक्त उसने पलक झपकते ही पुलिस को गच्चा दिया और वहां से रफूचक्कर हो गया।
वह थाने से लगभग 100 मीटर दूर स्थित एक खाली मकान में जा घुसा। सूचना मिलने पर बहोड़ापुर पुलिस के सिपाही और आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके में सघन सर्चिंग अभियान शुरू किया। लगभग 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, पुलिस को कामयाबी मिली। हनी दुबे एक डॉक्टर के बंद पड़े मकान में छिपा हुआ पाया गया। पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया और अब उसे कड़ी सुरक्षा के बीच वापस जेल भेज दिया गया है।
क्या है ट्रिपल मर्डर का इतिहास
हनी दुबे गुना का एक शातिर अपराधी है, जिसका नाम 2017 में हुए एक चर्चित हत्याकांड में सामने आया था। उस दौरान उसने अपनी मां पूनम दुबे के साथ मिलकर सिंचाई विभाग के एक अधिकारी के बेटे हेमंत मीणा का अपहरण कर लिया था। अपराधी का मकसद 50 लाख रुपये की फिरौती वसूलना था, लेकिन हनी ने हेमंत की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, अपने गुनाह के राज को हमेशा के लिए दफन करने के इरादे से हनी ने अपने दो साथियों लोकेश लोधा और ऋतिक नामदेव की भी हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड के दोषी पाए जाने पर मां और बेटे दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद से वे ग्वालियर सेंट्रल जेल में अपनी सजा काट रहे थे।
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