छात्रों को ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाले पुलिसकर्मी पर गिरी गाज, महाराष्ट्र में 90 जगहों पर हुआ विरोध

महाराष्ट्र में प्रदर्शनरत छात्रों को मादक पदार्थों के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने वाले पुलिसकर्मी को सेवा से निलंबित कर दिया गया है, जबकि राज्य में इस मुद्दे को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं।

पुलिसकर्मी पर कड़ी कार्रवाई

महाराष्ट्र में छात्र प्रदर्शनकारियों को ड्रग्स के फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देने के गंभीर मामले में आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए उसे नौकरी से हटा दिया है। इस मामले ने पूरे राज्य में तूल पकड़ लिया है। शिवसेना शिंदे गुट के नेता और महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित पुलिसकर्मी, जो एक ड्राइवर के तौर पर तैनात था, का व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य और गलत था। सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र सरकार विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर बेहद संवेदनशील है और इस प्रकरण में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि बुधवार तक इस मामले को लेकर महाराष्ट्र के कुल 90 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं, जिसके चलते वीबीए द्वारा कई इलाकों में बंद का आह्वान भी किया गया था।

कानून व्यवस्था और सोशल मीडिया पर निगरानी

प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा स्थिति पर बात करते हुए योगेश कदम ने चेतावनी दी कि छात्रों के इस आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो सकते हैं, जो राज्य की शांति भंग करने का प्रयास कर सकते हैं। यही कारण है कि पुलिस और सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति को किसी भी हाल में बिगड़ने न दिया जाए।

डिजिटल सर्विलांस के आरोपों को नकारा

प्रदर्शनकारियों को डिजिटल नोटिस भेजने और उनकी लोकेशन को अवैध रूप से ट्रैक करने के विपक्ष के आरोपों को गृह राज्य मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है और सरकार किसी की भी अवैध निगरानी नहीं कर रही है। जिन लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए हैं, उनके खिलाफ केवल प्रचलित कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जा रही है।

कांग्रेस ने बताया खाकी में गुंडागर्दी

गुरुवार को कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को आधार बनाकर इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस वीडियो में मुंबई का एक पुलिसकर्मी छात्र प्रदर्शनकारियों को खुलेआम ड्रग्स के झूठे केस में फंसाने की धमकी देता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने इस कृत्य को खाकी में गुंडागर्दी का नाम दिया है। वीडियो में दिख रहा पुलिसकर्मी छात्रों को डरा रहा है कि यदि वे आंदोलन में शामिल हुए, तो उन्हें मादक पदार्थ रखने के झूठे आरोपों में जेल भेज दिया जाएगा और उनकी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे बीतेगी। मुंबई कांग्रेस ने 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि यदि यह वीडियो सही है, तो यह लोकतंत्र और छात्रों के अधिकारों पर सीधा हमला है। पार्टी का कहना है कि सवाल पूछना या आवाज उठाना अपराध नहीं है, बल्कि छात्रों के सवालों का जवाब जिम्मेदारी से देना सरकार का काम है, न कि उन्हें डराना।

पुलिस मादक पदार्थ कहां से लाएगी

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि छात्रों को यह कहकर डराया जा रहा है कि उनकी जेब में 50 ग्राम ड्रग्स डालकर उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काला धब्बा करार दिया। वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया कि पुलिस का यह आचरण ब्रिटिश हुकूमत के जुल्मों से भी ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि पुलिस ऐसी धमकियां दे रही है, तो इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि आखिर पुलिस के पास मादक पदार्थ कहां से आएंगे, जिन्हें वे छात्रों पर प्लांट करने की बात कर रहे हैं।

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