बहराइच: सात साल के मासूम से दरिंदगी और हत्या के आरोपी को पॉक्सो कोर्ट ने दी फांसी

बहराइच की पॉक्सो अदालत ने एक सात वर्षीय बच्चे के साथ कुकर्म और उसकी नृशंस हत्या करने के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। पुलिस की सक्रियता और अदालत की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोप पत्र दाखिल होने के मात्र एक महीने के भीतर यह फैसला आया है।

त्वरित न्याय की मिसाल बना बहराइच का पॉक्सो केस

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की पॉक्सो अदालत ने एक अत्यंत जघन्य अपराध में फैसला सुनाते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। मामला सात साल के एक मासूम बच्चे के साथ कुकर्म करने और उसके बाद उसकी निर्मम तरीके से गला काटकर हत्या करने का है। न्यायिक प्रक्रिया में तेजी दिखाते हुए अदालत ने आरोप पत्र दाखिल होने के महज एक महीने के भीतर यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।

घटना का विवरण और वारदात

यह दर्दनाक घटना कैसरगंज थाना क्षेत्र के दयालपुरवा गांव में घटी थी। मामले के अनुसार, 13 मई को सात साल का मासूम बच्चा लापता हो गया था। अगले दिन सुबह गांव से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित झाड़ियों में बच्चे का गला कटा हुआ शव बरामद किया गया, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पीड़ित के पिता द्वारा दी गई शिकायत में बताया गया था कि उनका बेटा गांव के ही रहने वाले मुकेश निषाद के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने गया था, लेकिन वह वापस नहीं लौटा।

आरोपी की गिरफ्तारी और जुर्म का खुलासा

पुलिस ने शिकायत मिलने के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई और संदेह के घेरे में आए मुकेश निषाद को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि वह बच्चे को कुकर्म का शिकार बनाने के बाद उसकी हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में छिपा दिया था। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को जुटाते हुए 22 जून को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

न्यायालय का फैसला और कड़ी सजा

विशेष जिला शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो) संत प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अरबिंद कुमार गौतम ने मामले की सुनवाई करते हुए 21 वर्षीय दोषी मुकेश निषाद को फांसी की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि 12 मई, 2026 को बच्चा लापता हुआ था और उसके अगले दिन उसका शव घर से लगभग 400 मीटर दूर झाड़ियों में पाया गया था। छानबीन में सामने आया कि मासूम बच्चा शादी समारोह से अपने दो भाइयों के साथ लौट रहा था, तभी आरोपी मुकेश उसे नृत्य दिखाने के बहाने बहला-फुसलाकर ले गया था। अदालत द्वारा इतनी कम अवधि में फैसला सुनाना न्यायिक प्रणाली की गति और गंभीरता का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

अन्य कानूनी घटनाक्रम

न्यायिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में बहराइच के इस मामले के अलावा हाल ही में बलिया का सुनील यादव हत्याकांड भी चर्चा में रहा है। गैंगस्टर एक्ट से जुड़े इस मामले में विशेष न्यायाधीश की अदालत ने पुलिस द्वारा आरोपियों की रिमांड के लिए दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया था, क्योंकि अदालत ने पुलिस द्वारा दिए गए तर्कों को पर्याप्त नहीं पाया था।

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