बांग्लादेश में गहराता राजनीतिक संकट, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे की अटकलें तेज

बांग्लादेश में जारी राजनीतिक हलचल के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जल्द इस्तीफा देने की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से बातचीत के बाद सरकार उनसे खासी नाराज है।

सत्ता के गलियारों में बड़े बदलाव की आहट

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनका पांच साल का कार्यकाल खत्म होने में अभी लगभग दो साल का समय बाकी है, लेकिन सरकार उनके बने रहने को लेकर सहज नहीं है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक वरिष्ठ नेता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शहाबुद्दीन के जल्द ही पद छोड़ने की पूरी संभावना है।

क्यों राष्ट्रपति पद पर संकट के बादल

पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर कयासबाजी का दौर जारी है। दरअसल, तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार राष्ट्रपति पद पर किसी नए चेहरे को बिठाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। शहाबुद्दीन को लेकर विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि वह पिछली अवामी लीग सरकार के समय नियुक्त किए गए उन चुनिंदा संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों में से हैं, जो जुलाई और अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद भी कुर्सी पर बरकरार हैं। गौरतलब है कि उस व्यापक जनविद्रोह के चलते शेख हसीना की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद वह 5 अगस्त, 2024 को भारत चली गई थीं और तभी से वहीं रह रही हैं।

शेख हसीना से बातचीत बनी विवाद की जड़

अखबार प्रोथोम आलो ने एक उच्च सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया है कि सरकार इस बात से बेहद नाराज है कि शहाबुद्दीन ने हाल के दिनों में शेख हसीना से संपर्क साधने की कोशिश की थी। द डेली स्टार को दिए एक बयान में BNP के सीनियर नेता ने साफ किया कि केवल टेलीफोन पर हुई बातचीत ही उनके संभावित इस्तीफे का एकमात्र कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मसला काफी पेचीदा है, विशेषकर तब जब शेख हसीना ने खुद देश लौटने की घोषणा कर दी है, जिससे बांग्लादेश का राजनीतिक माहौल काफी संवेदनशील हो गया है।

दिसंबर में वापसी और कानूनी शिकंजा

शेख हसीना ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह दिसंबर महीने में बांग्लादेश लौट सकती हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश सरकार ने कहा कि वे उनके लौटने के निर्णय का स्वागत करते हैं, लेकिन उन्हें कानून और न्याय का सामना करना ही होगा। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 17 नवंबर, 2025 को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल को जुलाई विद्रोह के दौरान दमनकारी भूमिका के लिए उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। याद रहे कि मोहम्मद शहाबुद्दीन, जो 1971 के मुक्ति संग्राम के पूर्व सैनिक और निचली अदालत के पूर्व जज रहे हैं, ने अप्रैल 2023 में अपना कार्यभार संभाला था।

क्या है संवैधानिक प्रक्रिया

बांग्लादेश के संविधान के प्रावधानों के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने पद से त्यागपत्र देते हैं, तो नए राष्ट्राध्यक्ष के चयन तक संसदीय स्पीकर हफ़ीज़ुद्दीन अहमद अंतरिम राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगे। उल्लेखनीय है कि ICT-BD की स्थापना 2010 में शेख हसीना की सरकार द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के सहयोगियों पर मुकदमा चलाने के उद्देश्य से की गई थी। अब शेख हसीना के पतन के बाद, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस ट्रिब्यूनल के कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है ताकि मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए पूर्ववर्ती सरकार के नेताओं और अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

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