अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले का ईरानी दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC और ईरानी सेना ने गुरुवार को यह सनसनीखेज दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन और कुवैत की जमीन पर बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका द्वारा उनके देश के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि अभी बाकी है। ईरान की सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के अनुसार, IRGC ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भीषण हमले किए गए हैं, जिनमें अमेरिका का प्रसिद्ध थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रडार को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी आक्रामकता का माकूल जवाब देना जारी रखेंगे।
जॉर्डन की जनता को दिया संदेश
ईरान के सुरक्षा बलों ने आगे दावा किया है कि इस हमले में अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और सी-रैम (C-RAM) रडार भी धराशायी हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी सैन्य अड्डे पर स्थित ईंधन टैंकों में आग लग गई। IRGC ने यह भी दावा किया कि हमले के दौरान हेलीकॉप्टर से जुड़े उपकरणों का बड़ा गोदाम और हेलीकॉप्टरों की मरम्मत का केंद्र भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जॉर्डन के नागरिकों को संबोधित करते हुए IRGC ने कहा कि ईरान जॉर्डन की संप्रभुता और अखंडता का पूरा सम्मान करता है, लेकिन उनके अनुसार जॉर्डन की धरती पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों का होना ही उस देश की संप्रभुता का वास्तविक उल्लंघन है। बयान में कहा गया, अपने देश पर हमला करने वाले और हमारे बच्चों की हत्या करने वालों को, वे जहां से भी हमला करें, वहां जवाब देना हमारा कानूनी, धार्मिक और तार्किक अधिकार है।
कुवैत में ऑपरेशन लाइटनिंग का असर
वहीं दूसरी ओर, ईरानी सेना ने ऑपरेशन लाइटनिंग के 23वें चरण की शुरुआत का ऐलान करते हुए कहा कि उन्होंने ड्रोन हमलों के जरिए कुवैत में स्थित अमेरिका के 3 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी सेना के जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, इन ड्रोन हमलों में दोहा बेस पर मौजूद गोला-बारूद और लॉजिस्टिक्स डिपो, अली अल सलेम बेस के ईंधन टैंक और अरिफजान कैंप के गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया गया। सेना ने आधिकारिक बयान में कहा कि दुश्मन की लगातार आक्रामकता के जवाब में, ईरान की सेना ने अपने शक्तिशाली ड्रोन का उपयोग करते हुए दोहा बेस के रसद डिपो, अली अल सलेम बेस के ईंधन टैंक और अरिफजान कैंप के गोला-बारूद भंडार को क्षतिग्रस्त किया है।
कुवैत की संप्रभुता पर ईरान का स्पष्टीकरण
IRGC ने एक और बयान में स्पष्ट किया कि उनके बलों ने कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी सुविधाओं को पूरी तरह निशाना बनाया है। उनका दावा है कि इस कार्रवाई में सैन्य उपकरणों का गोदाम, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और MQ-9 ड्रोन के हैंगर को नष्ट किया गया है। इसके अलावा, अमेरिकी सैनिकों के रहने के स्थान, अल-अदीरी बैरक में बने हेलीकॉप्टर हैंगर और कम्युनिकेशन हैंगर को भी नुकसान पहुंचाया गया है। कुवैत के लोगों को आश्वस्त करते हुए IRGC ने कहा कि यह हमला कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि उनका लक्ष्य केवल अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। उन्होंने कहा, आपकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन अमेरिका ने किया है, हमने नहीं।
अमेरिका की 12वीं रात की सैन्य कार्रवाई
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने ईरान के खिलाफ लगातार 12वीं रात भी सैन्य हमले जारी रखे हैं। सेंटकॉम के अनुसार, 22 जुलाई की रात 10:30 बजे अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह हमले पूरे किए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों में ईरान की समुद्री सैन्य क्षमता, मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र, तटीय निगरानी ठिकाने और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया है। CENTCOM का दावा है कि इन ऑपरेशनों से ईरान की व्यावसायिक पोतों पर हमला करने की क्षमता कमजोर हुई है।
सैन्य नाकेबंदी और तैनाती
CENTCOM ने जानकारी दी है कि इस महीने उन्होंने ईरान के भीतर दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुए 14 सूत्रीय MoU के टूटने के बाद, ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी गई है। अमेरिकी सैन्य कमान के अनुसार अब तक 9 कमर्शियल जहाजों का मार्ग बदला गया है और एक जहाज को निष्क्रिय किया गया है ताकि ईरानी बंदरगाहों की आवाजाही को रोका जा सके। फिलहाल पश्चिम एशिया में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं जो किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं।
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