मातृ और शिशु स्वास्थ्य को लेकर CAG की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण योजनाओं पर भारी-भरकम बजट खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थितियां अब भी बेहद चिंताजनक बनी हुई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और आंगनबाड़ियों के कामकाज को लेकर कई गंभीर कमियां उजागर की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में राज्य में मातृ और शिशु मृत्यु दर में गिरावट तो दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद देश के अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश आज भी इस मामले में शीर्ष पर बना हुआ है।
करोड़ों खर्च करने के बाद भी सुधार की दर धीमी
स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। CAG की रिपोर्ट के अनुसार, मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य में 20,565 करोड़ रुपये की बड़ी राशि खर्च की गई है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी बुनियादी ढांचे और सेवाओं में जिस रफ्तार से सुधार होना चाहिए था, वह दिखाई नहीं दे रहा है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि राज्य में अब भी व्यापक सुधार और कड़ी निगरानी की सख्त आवश्यकता है ताकि इस खर्च का सही लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
क्या कहते हैं मातृ-शिशु मृत्यु दर के ताजा आंकड़े?
CAG की ऑडिट रिपोर्ट में राज्य की स्वास्थ्य स्थिति में हुए आंशिक सुधार और चुनौतियों दोनों को आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया गया है:
- मातृ मृत्यु दर (MMR): राज्य में पहले प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु दर 173 थी, जो अब घटकर 135 पर आ गई है।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): पहले प्रति एक हजार जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर 52 थी, जिसमें सुधार हुआ है और अब यह घटकर 35 पर पहुंच गई है।
हालांकि इन आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि सरकारी स्तर पर कुछ सकारात्मक बदलाव जरूर हुए हैं। लेकिन जब हम इसकी तुलना राष्ट्रीय औसत और देश के अन्य विकसित राज्यों से करते हैं, तो मध्यप्रदेश की स्थिति अब भी बेहद चिंताजनक श्रेणी में आती है।
आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में भारी कमियां
रिपोर्ट में मुख्य रूप से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं तथा आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। कई क्षेत्रों में आंगनबाड़ियों के पास स्वयं के भवन नहीं हैं, वहीं कई जगहों पर पोषण आहार के वितरण और गर्भवती महिलाओं व नवजातों की देखभाल से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर खामियां पाई गई हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों, नर्सों और आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों की कमी भी इस ऊंची मृत्यु दर के लिए जिम्मेदार मानी गई है। प्रशासन को इन बुनियादी कमियों को दूर करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे ताकि आगामी वर्षों में राज्य इस संवेदनशील मामले में बेहतर प्रदर्शन कर सके।
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