मंडी के देवरी स्कूल विवाद में सुक्खू सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, जवाब नहीं देने पर जताई नाराजगी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी के देवरी स्कूल के नवनिर्मित भवन में छात्रों को शिफ्ट न करने के मामले में सुक्खू सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। सरकार द्वारा समय पर जवाब दाखिल न करने पर अदालत ने नाराजगी जताई है और अगली सुनवाई 5 अगस्त के लिए तय की गई है।

स्कूल भवन तैयार, फिर भी छात्र बाहर

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर हाईकोर्ट के निशाने पर है। मामला मंडी जिले के द्रंग क्षेत्र के पधर स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल देवरी से जुड़ा है। इस स्कूल की नई इमारत बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके बावजूद विद्यार्थियों को उसमें शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई और जल्द से जल्द अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

बीते 22 जुलाई को जब इस मामले पर सुनवाई हुई, तो सरकार की निष्क्रियता पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने सरकार से स्पष्ट तौर पर सवाल किया कि जब स्कूल का नया भवन पूरी तरह से बनकर तैयार है, तो फिर बच्चों को उस नई इमारत में जाने से क्यों रोका जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि 5 अगस्त तक सरकार को अपना जवाब हर हाल में कोर्ट में पेश करना होगा। सरकार को बताना होगा कि वह कौन से कारण हैं जिनकी वजह से छात्रों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण देने के बजाय पुरानी व्यवस्था में ही रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह मामला सिर्फ एक भवन के निर्माण का नहीं, बल्कि स्थानीय विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का संघर्ष

क्षेत्र के निवासी और अभिभावक लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं कि तैयार हो चुके स्कूल भवन को बिना किसी अनावश्यक देरी के शुरू कर दिया जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति गंभीर है, तो उन्हें तुरंत नए भवन में शिफ्ट किया जाना चाहिए। इस पूरे कानूनी मामले की पैरवी हाईकोर्ट में अधिवक्ता उदयनंद शर्मा कर रहे हैं, जो इस विषय पर काफी सक्रिय हैं। क्षेत्र के लोगों को अब उम्मीद है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगी और जल्द से जल्द विद्यार्थियों के हित में स्कूल भवन के संचालन की प्रक्रिया को शुरू करेगी।

मंत्री के उद्घाटन पर क्यों मचा था बवाल

गौरतलब है कि यह स्कूल पिछले काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर इस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन करने के लिए वहां पहुंचे थे, लेकिन कार्यक्रम के बीच में ही उन्हें रोक दिया गया था। इस घटना के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया था। इसके बाद यह पूरा विवाद हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया।

प्रियंका गांधी से जुड़ा है पूरा घटनाक्रम

इस स्कूल के पीछे की पूरी कहानी बेहद दिलचस्प और संवेदनशील है। दरअसल, जब इस स्कूल की पुरानी इमारत भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड की चपेट में आकर बह गई थी, तब उस स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रियंका गांधी वहां पहुंची थीं। उसी दौरान उन्होंने नए स्कूल भवन के निर्माण की घोषणा की थी। सरकार अब चाहती है कि नवनिर्मित भवन का उद्घाटन उन्हीं के हाथों हो। करीब पौने पांच करोड़ रुपये की लागत से यह नया भवन बनकर तैयार हुआ है। हालांकि, उद्घाटन की राजनीति के चक्कर में बच्चों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है और वे सुविधा संपन्न स्कूल में बैठने से महरूम हैं।

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