हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में ब्यास नदी के बढ़ते जलस्तर और बांधों से अचानक छोड़े जाने वाले पानी के खतरे से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी BBMB प्रशासन ने पंडोह डैम से लेकर मंडी शहर तक छह बेहद आधुनिक अलार्मिंग सिस्टम लगाने का काम पूरा कर लिया है। इस पूरे सुरक्षा प्रोजेक्ट पर करीब 1.4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। इस नई तकनीक के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद अब नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की जान को अचानक पानी छोड़े जाने के कारण कोई खतरा नहीं रहेगा।
डैम सेफ्टी एक्ट 2021 के कड़े नियमों के तहत की गई कार्रवाई
इस महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली को स्थापित करने के पीछे केंद्र सरकार के सुरक्षा मानक हैं। BBMB प्रबंधन ने देश में लागू किए गए डैम सेफ्टी एक्ट 2021 के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करते हुए इस कार्य को पूरा किया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए BBMB के अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता चंद्रमणी शर्मा ने बताया कि इस अलार्मिंग सिस्टम को लगाने का काम इसी साल 30 अप्रैल को ही सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया था। अब यह पूरी प्रणाली पूरी तरह से काम कर रही है। इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति में नदी के आसपास मौजूद हर एक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर जाने का पूरा समय मिल सके।
पानी छोड़ने से ठीक आधा घंटा पहले सक्रिय होगा अलर्ट
अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता चंद्रमणी शर्मा ने इस आधुनिक सिस्टम की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि जब भी पंडोह डैम के गेट खोलने या वहां से पानी छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा, तो उससे ठीक आधा घंटा पहले इस सिस्टम के जरिए चेतावनी जारी कर दी जाएगी। इससे नदी के पास के इलाकों में रहने वाले स्थानीय निवासियों, पर्यटकों या वहां से गुजर रहे लोगों तक तुरंत सूचना पहुंच जाएगी और वे समय रहते नदी से दूर चले जाएंगे। इस व्यवस्था से नदी किनारे किसी भी तरह की अनहोनी होने की संभावना खत्म हो जाएगी।
हूटर के साथ-साथ लाउडस्पीकर से घोषणा की भी बड़ी सुविधा
यह नया अलार्मिंग सिस्टम केवल साधारण सायरन या हूटर बजाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे बहुउपयोगी बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली में कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं।
- आम तौर पर हूटर बजाकर ही लोगों को नदी से दूर रहने के लिए सचेत किया जाएगा।
- यदि कोई आपातकालीन स्थिति पैदा होती है, तो इस सिस्टम के जरिए वॉयस संदेश प्रसारित किया जा सकेगा।
- यह वॉयस संदेश पहले से रिकॉर्ड किया हुआ भी हो सकता है और जरूरत पड़ने पर कंट्रोल रूम से सीधे लाइव भी बोला जा सकता है।
इस प्रकार की आवाज आधारित चेतावनी प्रणाली से स्थानीय लोग और पर्यटक स्थिति की गंभीरता को आसानी से समझ सकेंगे और सुरक्षित स्थान की ओर तुरंत कदम बढ़ा सकेंगे।
थलौट हादसे की दर्दनाक यादों से लिया गया सबक
मंडी से आगे थलौट में साल पहले एक बेहद दुखद हादसा पेश आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस हादसे में हैदराबाद के 30 बच्चे ब्यास नदी के किनारे मौजूद थे, तभी अचानक लारजी डैम से पानी छोड़ दिया गया था और वे सभी बच्चे नदी के तेज बहाव में बह गए थे। इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही ब्यास नदी के किनारे पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों और पूर्व चेतावनी प्रणालियों की जरूरत महसूस की जा रही थी। उसी हादसे से सबक लेते हुए अब प्रशासन ने यह सुरक्षा प्रणाली स्थापित की है। इसके अलावा, मानसून के दिनों में ब्यास नदी में बाढ़ के दौरान डैम के गेट खोलने पड़ते हैं और पहले लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती थी, लेकिन अब इस अलार्मिंग सिस्टम के लग जाने से ऐसी किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान नहीं होगा।
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