लाल सागर में कोहराम: हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर दागी मिसाइलें, खौफ के कारण 10 जहाजों को पीछे हटना पड़ा

यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है, जिसके बाद सुरक्षा चिंताओं के कारण 10 अन्य जहाजों को वापस लौटना पड़ा है।

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो बड़े तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने का दावा किया है। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। यह हमला सऊदी अरब की सेना द्वारा सना हवाई अड्डे पर किए गए हवाई हमलों के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिसने रियाद और हूती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष की आग को और भड़का दिया है। हूती संगठन के आधिकारिक सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी कासिम सरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने दावा किया कि हूती नौसेना ने सऊदी अरब के दो प्रमुख तेल टैंकरों एंशेलिया और लैला को निशाना बनाया है।

विशेष सैन्य अभियान के तहत की गई कार्रवाई

सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी कासिम सरी के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने इन दोनों जहाजों को निशाना बनाने के लिए एक विशेष सैन्य अभियान चलाया था। इस कार्रवाई की मुख्य वजह यह बताई गई है कि इन जहाजों ने लाल सागर के भीतर हूती संगठन द्वारा लागू किए गए घेराव और प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था।

प्रवक्ता ने अपने आधिकारिक बयान में इस आक्रामक कार्रवाई की वजह स्पष्ट करते हुए कहा:

यह सैन्य कार्रवाई दुश्मन सऊदी अरब द्वारा हमारे देश और लोगों पर पिछले 12 वर्षों से थोपे गए अन्यायपूर्ण तथा दमनकारी घेराव का मुकाबला करने के लिए की गई है। हम इसके माध्यम से 'घेराव के बदले घेराव' की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। यह कदम सऊदी और अमेरिकी ताकतों द्वारा किए जा रहे अन्याय का सामना करने तथा अपने नागरिकों की संपत्तियों और अधिकारों की रक्षा के लिए हमारे अधिकारों की पुष्टि करता है।

हमले में आधुनिक मिसाइलों और ड्रोन का हुआ इस्तेमाल

हूती प्रवक्ता ने हमले के तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे सैन्य ऑपरेशन के दौरान कई घातक बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ कई ड्रोन का एक साथ उपयोग किया गया था। प्रवक्ता का दावा है कि उनके हमले पूरी तरह से सटीक रहे और दोनों ही तेल टैंकरों पर सीधी टक्कर हुई, जिससे उन जहाजों के भीतर भयानक आग लग गई। इस गंभीर हादसे के बाद समुद्री मार्ग से गुजरने वाले अन्य वाणिज्यिक जहाजों में अफरा-तफरी मच गई।

डर के कारण मार्ग से पीछे हटे 10 बड़े जहाज

इस भीषण हमले का तात्कालिक असर यह हुआ कि लाल सागर के इस संवेदनशील क्षेत्र से गुजरने वाले करीब 10 जहाजों को सुरक्षा कारणों से पीछे हटने के लिए विवश होना पड़ा। हूती विद्रोहियों के डर से इन जहाजों ने आगे बढ़ने के बजाय वापस लौटने का फैसला किया। प्रवक्ता याह्या सरी ने स्पष्ट किया कि उनके लड़ाके सऊदी अरब के खिलाफ अपनी नौसैनिक सैन्य गतिविधियों को इसी प्रकार जारी रखेंगे और 'घेराबंदी के बदले घेराबंदी' के अपने नियम पर डटे रहेंगे।

सऊदी अरब को मिली गंभीर सैन्य चेतावनी

हूती प्रवक्ता ने रियाद को गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि हमारे यमन देश को निशाना बनाकर कोई भी जवाबी हमला या अन्य नादानी की गई, तो उसका जवाब सऊदी अरब की सीमा के भीतर घुसकर बड़े पैमाने पर किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि हमारे अगले सैन्य अभियान सीधे तौर पर सऊदी अरब के जमीनी ठिकानों पर होंगे, जिसके बेहद गंभीर और विनाशकारी परिणाम सऊदी अरब को भुगतने पड़ेंगे।

बाब-अल-मंडेब जलमार्ग सऊदी जहाजों के लिए हुआ बंद

हाल ही में यमन के पास स्थित लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों के लिए पूरी तरह से बंद करने का ऐलान किया है। इस प्रतिबंध के कारण अब अन्य देशों के वाणिज्यिक जहाज भी इस रास्ते से गुजरने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें भी हूती हमलों का गहरा डर सता रहा है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल व्यापार का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा इसी महत्वपूर्ण बाब-अल-मंडेब जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस बड़े व्यापारिक मार्ग के बाधित होने से वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है।

https://www.indiatv.in/world/asia/houthis-claim-attack-on-two-saudi-oil-tankers-in-red-sea-middle-east-conflict-2026-07-23-1232901