नेपाल की भारी बारिश से बिहार के गोपालगंज में बढ़ा बाढ़ का संकट, गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न

नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से बिहार के गोपालगंज में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। दियारा क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव पानी से घिर चुके हैं और प्रशासन की तैयारियों पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।

गंडक नदी का रौद्र रूप और गोपालगंज में अलर्ट

नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश का सीधा और गंभीर असर अब बिहार के गोपालगंज जिले में दिखाई देने लगा है। गंडक नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से स्थानीय प्रशासन और आम जनता की चिंताएं बढ़ गई हैं। नदी पूरी तरह उफान पर है और इसका पानी तेजी से निचले इलाकों यानी दियारा क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। स्थिति यह हो गई है कि इलाके के आधा दर्जन से अधिक गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं, जिससे निवासियों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।

सदर प्रखंड के गांवों में विकट स्थिति

बाढ़ का सबसे घातक प्रभाव गोपालगंज जिले के सदर प्रखंड के दियारा इलाके में देखा जा रहा है। यहां के लोग इस समय भारी दहशत और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। नदी के पानी के बढ़ते स्तर को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यदि जलस्तर में कमी नहीं आई, तो बहुत जल्द इन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह से टूट जाएगा। आवागमन के रास्ते बंद होने की स्थिति में ग्रामीणों के लिए न केवल रोजमर्रा का जरूरी सामान जुटाना मुश्किल होगा, बल्कि आपातकालीन स्थिति में बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती बन जाएगी।

खाप मकसूदपुर गांव के निवासियों की आपबीती

खाप मकसूदपुर गांव में रहने वाले लोगों के लिए यह बाढ़ सबसे अधिक विनाशकारी साबित हो रही है। इस गांव की अधिकांश आबादी अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर है। पशुपालक दूध बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन अब बाढ़ के पानी ने उनके सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न कर दिया है। ग्रामीण अपने मवेशियों को बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर ले जाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। पशुओं के लिए हरे चारे का प्रबंध करना भी अब एक बड़ी समस्या बन गया है। कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने घरेलू सामानों को भी ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है, क्योंकि वे जानते हैं कि गंडक नदी का रौद्र रूप कभी भी विकराल हो सकता है।

प्रशासन की चेतावनी और ग्रामीणों की नाराजगी

जिला प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक आधिकारिक चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्हें सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने की सलाह दी गई है। हालांकि, धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन की तैयारियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ आने की पूर्व सूचना के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक किसी भी राहत शिविर का निर्माण नहीं किया गया है। सामुदायिक शेड तैयार नहीं हैं और न ही पशुओं को आश्रय देने के लिए कोई सुरक्षित स्थल ही चिन्हित किया गया है। चारे की कमी के कारण पशुपालक बेहद परेशान हैं और ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बाढ़ आपदा आने से काफी पहले ही प्रशासन को तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए थी।

हर साल का संकट और 62 प्रभावित गांवों की स्थिति

गोपालगंज में गंडक नदी के कारण बाढ़ का यह कोई पहला मामला नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि जिले के छह प्रखंडों में स्थित कुल 62 गांव हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर होते हैं। इस बार नेपाल में हुई अत्यधिक वर्षा ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण रात-रात भर जागकर नदी के बढ़ते जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन इन लोगों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि यदि नेपाल की ओर से बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो जलस्तर और अधिक ऊपर जा सकता है, जिससे हालात और भी बदतर होने की पूरी संभावना है।

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