कुनाल घोष के निलंबन पर पश्चिम बंगाल में सियासत गरम, दिलीप घोष ने टीएमसी पर साधा निशाना

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुनाल घोष के निलंबन के बाद बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है। दिलीप घोष ने इसे पार्टी के बिखराव और बौखलाहट का नतीजा बताया है।

सदन में हंगामे के बाद निलंबन की कार्रवाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुनाल घोष को निलंबित किए जाने के बाद सूबे की राजनीति में भारी हलचल मची हुई है। इस घटनाक्रम ने सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच नई तकरार को जन्म दे दिया है। इस पूरे मामले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिलीप घोष का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस वर्तमान में विघटन के दौर से गुजर रही है और पार्टी नेतृत्व की हताशा व बौखलाहट इस तरह के फैसलों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

दिलीप घोष का कड़ा प्रहार

पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिलीप घोष ने कुनाल घोष पर कटाक्ष किया और कहा कि वे खुद को एक क्रांतिकारी चेहरा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुनाल घोष पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं और जिस खेमे की वे अगुवाई कर रहे हैं, वहां उनके साथ समर्थकों का कोई बड़ा आधार नहीं है। दिलीप घोष के अनुसार, कुनाल घोष अकेले पड़ गए हैं और वे आंतरिक कलह से जूझ रहे हैं। सदन की गरिमा को लेकर अध्यक्ष द्वारा लिए गए निर्णय का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना आवश्यक था। दिलीप घोष ने आगे कहा कि बार-बार सदन की कार्यवाही में बाधा डालना उचित नहीं है, इसलिए अध्यक्ष ने उन्हें सदन से बाहर निकालने का सही फैसला लिया है।

निलंबन की पूरी पृष्ठभूमि

इस पूरे हंगामे की शुरुआत गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान हुई। उस समय टीएमसी के बागी मुख्य सचेतक अखरुज्जमान अपना संबोधन दे रहे थे, तभी कुनाल घोष ने उनके भाषण के बीच में ही हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। इसी व्यवधान के चलते विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें तत्काल प्रभाव से उस दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया। इसके उपरांत, मार्शल की मदद से उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि मंत्री तापस रॉय ने अध्यक्ष के समक्ष प्रस्ताव रखा कि कुनाल घोष को मौजूदा विधानसभा सत्र की शेष अवधि के लिए भी निलंबित रखा जाए।

सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया

इस प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कुनाल घोष के व्यवहार को पूरी तरह अनुचित करार दिया है। सुवेंदु अधिकारी ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में विपक्षी दल की भी अपनी जिम्मेदारियां होती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वे स्वयं विपक्ष में रहे हैं, लेकिन मर्यादित व्यवहार कभी नहीं छोड़ा। अखरुज्जमान का बचाव करते हुए उन्होंने उन्हें एक वरिष्ठ विधायक और सम्मानित पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति बताया।

कल्याण बनर्जी का निलंबन और आरोप

दूसरी तरफ, लोकसभा में भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर कार्रवाई की गई है। महिला सांसदों के प्रति अभद्र भाषा और अनुचित व्यवहार के आरोपों के बाद उन्हें लोकसभा के शेष मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। अपने निलंबन के बाद कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इन बागी नेताओं को गद्दार और बेईमान करार देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता में इनका कोई आधार नहीं है। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि यह महज बीस लोगों का समूह है, जिनका जनाधार नगण्य है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि एक साल के भीतर वर्तमान सरकार गिर जाएगी।

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