जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण मामले पर सपा का बड़ा कदम, 23 जुलाई को रामपुर में विरोध प्रदर्शन की तैयारी

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रशासन की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में समाजवादी पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शन करेगा। इस बीच, जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर धारा 163 लागू कर दी है।

रामपुर में समाजवादी पार्टी का शक्ति प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर संकट के बादल गहरा गए हैं। विश्वविद्यालय में कथित अवैध निर्माण को गिराने के प्रशासन के आदेश के विरोध में समाजवादी पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे पर पार्टी ने एक 28 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। समाजवादी पार्टी के इस दल की अगुवाई उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में माल अख्तर और पिंकी सिंह जैसे प्रमुख नेताओं के साथ-साथ मुरादाबाद, रामपुर और बरेली के स्थानीय पार्टी पदाधिकारी भी शामिल किए गए हैं।

योजना के मुताबिक, यह प्रतिनिधिमंडल 23 जुलाई को रामपुर पहुंचेगा और जिलाधिकारी से मुलाकात कर ध्वस्तीकरण के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग करेगा। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें अनुमति मिली, तो वे जेल में बंद सपा नेता आजम खान से भी मुलाकात कर सकते हैं।

प्रशासन की सख्ती और धारा 163

कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए रामपुर के अपर जिलाधिकारी नितिन मदान ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 को 20 जुलाई से प्रभावी कर दिया है, जो 11 सितंबर तक लागू रहेगी। इस धारा के लागू होने के पीछे आने वाले त्योहारों और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने का तर्क दिया गया है। इसके अलावा, आगामी परीक्षाओं को देखते हुए प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में फोटोकॉपी की दुकानों को बंद रखने का निर्देश दिया है।

विश्वविद्यालय पर 38 भवनों को हटाने का दबाव

रामपुर विकास प्राधिकरण यानी आरडीए की ओर से जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। प्राधिकरण ने परिसर के भीतर बने 38 कथित अवैध भवनों को गिराने या हटाने का आदेश दिया है। आरडीए का दावा है कि 28 जून को जौहर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन ट्रस्ट के सचिव निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण की स्वीकृति से संबंधित जरूरी दस्तावेज जमा करने में विफल रहे।

प्राधिकरण के अनुसार, यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 82,309.80 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना अनुमति के निर्माण कार्य किया गया है। अधिकारियों का आरोप है कि परिसर में कुल 38 ब्लॉक बिना किसी स्वीकृत भवन मानचित्र के खड़े किए गए, जबकि जिला पंचायत से मात्र दो भवनों के लिए ही पूर्व अनुमति ली गई थी। इसके अतिरिक्त, लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय के अंदर स्थित एक सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित करते हुए वहां बोर्ड भी लगा दिया है। आरडीए ने ट्रस्ट को इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है और चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा में कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रशासन खुद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर देगा।

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