आधुनिक खेती को बढ़ावा देने की सरकारी पहल
खेती के पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक और संरक्षित तकनीक अपनाने वाले किसानों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है। बिलासपुर उद्यान विभाग ने किसानों को पॉलीहाउस लगाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सब्सिडी योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचाना और सालभर फसलों का उत्पादन सुनिश्चित करके उनकी आमदनी में बढ़ोतरी करना है। उद्यान विभाग के उप-संचालक डॉ कमलेश दीवान ने बताया कि सरकार इस निर्माण कार्य पर कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान कर रही है।
पॉलीहाउस के प्रकार और चयन
योजना के तहत किसान अपनी कृषि योग्य भूमि और जरूरत के अनुसार पॉलीहाउस का चयन कर सकते हैं। इसमें किसान 500 वर्गमीटर से लेकर अधिकतम 4000 वर्गमीटर तक के क्षेत्रफल में पॉलीहाउस स्थापित कर सकते हैं। तकनीकी रूप से दो मुख्य विकल्पों की सुविधा दी गई है:
- नैचुरल वेंटिलेटेड पॉलीहाउस: यह प्राकृतिक हवा के बहाव पर आधारित संरचना है।
- फैन एंड पैड सिस्टम वेंटिलेटेड पॉलीहाउस: इसमें तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित करने के लिए मशीनीकृत प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
किसान अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार इनमें से किसी भी एक प्रणाली को चुनकर निर्माण कार्य करवा सकते हैं। दोनों ही प्रकार की संरचनाओं पर सरकारी नियमानुसार सब्सिडी का लाभ मान्य है।
सब्सिडी की प्रक्रिया और भुगतान
इस सब्सिडी योजना का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। इसमें किसान को सबसे पहले अपने निजी स्तर पर पॉलीहाउस का निर्माण पूर्ण कराना होगा। निर्माण प्रक्रिया पूरी होने के बाद, किसान को उससे संबंधित सभी पक्के बिल और आवश्यक दस्तावेज उद्यान विभाग के कार्यालय में जमा करने होते हैं। विभाग इन दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन और जांच करेगा। एक बार विभागीय स्वीकृति मिलने के उपरांत, अनुदान की राशि सीधे पात्र किसान के बैंक खाते में स्थानांतरित (ट्रांसफर) कर दी जाएगी।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
योजना में शामिल होने के इच्छुक किसानों को कुछ जरूरी कागजात तैयार रखने होंगे। आवेदन के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रति उद्यान विभाग में जमा करना अनिवार्य है:
- भूमि से संबंधित अद्यतन नक्शा।
- खसरा और बी-1 की प्रति।
- किसान का आधार कार्ड।
- बैंक खाते का विवरण जिसमें सब्सिडी की राशि प्राप्त की जा सके।
विभाग के अनुसार, दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पात्रता का अंतिम निर्णय लिया जाएगा, इसलिए सही और वैध कागजात प्रस्तुत करना अत्यंत आवश्यक है।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर चयन
उद्यान विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सीमित है और इसका वितरण पहले आओ, पहले पाओ की नीति पर आधारित है। इसका अर्थ यह है कि जो किसान जल्द से जल्द आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण करेंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाएगा। इच्छुक किसान अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रिया समझने के लिए अपने निकटतम ब्लॉक स्तरीय उद्यानिकी विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। यह पहल उन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है जो संरक्षित खेती के माध्यम से बाजार में अपनी पहुंच और लाभ बढ़ाना चाहते हैं।
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