ससुर के अनोखे तोहफे से बदली दामाद की किस्मत, बनारस के युवक ने बालोद में बिना पूंजी के शुरू किया सफल कारोबार

छत्तीसगढ़ के बालोद में ससुर और दामाद के अनोखे रिश्ते की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है, जहां ससुर ने अपने दामाद को न केवल रोजगार का साधन दिया, बल्कि बिना किसी निवेश के उसे आत्मनिर्भर बनाया। आज रविकांत गुप्ता अपनी चाट की दुकान के जरिए इलाके में मशहूर हो चुके हैं।

दामाद को ससुर का अनमोल उपहार

आमतौर पर ससुर और दामाद के रिश्ते को लेकर कई तरह की कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसी खबर आई है जो रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ती है। यहाँ एक ससुर ने अपने दामाद को न केवल व्यवसाय के अवसर दिए, बल्कि उसे खुद खड़े होने के लिए पूरी तरह से तैयार किया। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे सेटअप के लिए दामाद को अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। ससुर ने न केवल अपना पहले से स्थापित चाट सेंटर दामाद को सौंप दिया, बल्कि उसे चाट बनाने की कला और व्यापार के तमाम बारीकियों में भी पारंगत किया। आज वही चाट सेंटर दामाद के लिए आय का मुख्य जरिया बन गया है और दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है।

बनारस से बालोद तक का सफर

इस सफलता की कहानी के नायक रविकांत गुप्ता हैं। रविकांत मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बनारस के रहने वाले हैं। आज से करीब 25 साल पहले, उन्होंने खेती और किसानी के काम को पीछे छोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के बालोद की ओर रुख किया था। उन दिनों उन्हें रोजगार की तलाश थी। इसी दौरान उनके ससुर ने उन्हें सहारा दिया और एक तैयार चाट सेंटर उन्हें सौंप दिया। बिना किसी पूंजी निवेश के मिले इस बिजनेस ने रविकांत की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। ससुर ने केवल दुकान ही नहीं दी, बल्कि स्वाद को कैसे बरकरार रखा जाए और ग्राहकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए, इसके गुर भी सिखाए। इसी मार्गदर्शन का परिणाम है कि आज रविकांत का नाम बालोद के सबसे बेहतरीन चाट विक्रेताओं में लिया जाता है।

खास स्वाद और बढ़ती लोकप्रियता

वर्तमान में रविकांत गुप्ता बालोद और झलमला स्थित मां गंगा मइया पावन धाम के मुख्य द्वार के सामने अपनी दुकान संचालित करते हैं। यहां मिलने वाली विशेष फ्राई चाट पूरे जिले में अपनी अलग पहचान रखती है। विशेषकर बरसात के मौसम में यहां के गर्म चाट का आनंद लेने के लिए लोगों का तांता लग जाता है। शाम ढलते ही उनकी दुकान ग्राहकों से खचाखच भर जाती है। रविकांत अपनी फ्राई चाट में समोसा, आलू टिक्की, खस्ता, टमाटर, दही और प्याज का इस्तेमाल करते हैं। उनकी दुकान की सबसे बड़ी खासियत उनका सीक्रेट गरम मसाला है, जो चाट के स्वाद को लाजवाब बना देता है। यही कारण है कि वर्षों पुराने ग्राहक आज भी उनकी दुकान पर खिंचे चले आते हैं और नए लोगों को भी वहां आने की सलाह देते हैं।

त्योहारों पर होती है बंपर कमाई

रविकांत की दुकान सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खुली रहती है। उनके काम का गणित त्योहारों के दौरान और अधिक बढ़ जाता है। रविकांत के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में उन्हें प्रतिदिन औसतन 2000 रुपये की आमदनी हो जाती है। वहीं, नवरात्रि के नौ दिनों में यह कमाई प्रतिदिन 5000 रुपये तक पहुंच जाती है। सामान्य दिनों में भी ग्राहकों का आना-जाना बना रहता है, जिससे परिवार का जीवन स्तर काफी बेहतर हो गया है।

आम लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा

उनकी दुकान पर चाट की कीमत भी काफी किफायती है। यहां 20 रुपये में हाफ प्लेट और 30 रुपये में फुल प्लेट फ्राई चाट उपलब्ध है। कम कीमत, बेहतरीन स्वाद और वर्षों का भरोसा ही उनकी सफलता का मूल मंत्र है। रविकांत की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो कम लागत में अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा रखते हैं। ससुर के उस एक फैसले ने आज रविकांत को न केवल स्वावलंबी बनाया है, बल्कि उन्हें समाज में एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित भी किया है।

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