तेहरान की दो टूक, अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी राष्ट्रों को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की जाती है या देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाया जाता है, तो ईरान पूरी ताकत के साथ निर्णायक जवाब देगा। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए ईरान की रक्षा नीति को साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनका रुख स्पष्ट है, यानी 'आंख के बदले आंख'। अरागची ने चेतावनी दी कि यदि कोई अन्य देश अमेरिका की किसी भी प्रकार की सहायता करता है, तो उसे भी वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा और उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
या तो सब सुरक्षित रहेंगे या फिर कोई नहीं
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगैर गालिबफ ने भी इस स्थिति पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने युद्ध के समीकरण को समझाते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में या तो सभी सुरक्षित रहेंगे या फिर कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। गालिबफ ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान को अपना तेल बेचने से रोका गया, तो क्षेत्र का कोई भी अन्य देश तेल का निर्यात नहीं कर पाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती है, तो क्षेत्र में मौजूद कोई भी ढांचा सुरक्षित नहीं बचेगा। गालिबफ ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के मुद्दे पर भी जोर देते हुए कहा कि वहां की सुरक्षा तभी संभव है जब अमेरिकी सेना का वहां से पूरी तरह खात्मा हो जाए। उन्होंने दोहराया कि होर्मुज में अब पहले जैसी स्थिति कभी वापस नहीं आएगी।
नियम मानना अनिवार्य, अन्यथा तेल निर्यात बंद
ईरान के सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वॉर्टर ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अभी भी नियंत्रण में है और यह मार्ग बंद है। बयान में कहा गया कि जो भी जहाज यहां से गुजरना चाहते हैं, उन्हें पहले से निर्धारित नियमों और तय रास्तों का कड़ाई से पालन करना होगा। हेडक्वॉर्टर ने चेतावनी के लहजे में कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की हिम्मत की, तो ईरानी सेना क्षेत्र से एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने देगी। ईरान का मानना है कि अमेरिका और उसकी सेना की धमकियां केवल पूरे क्षेत्र में युद्ध को भड़काने और उसे और अधिक विस्तार देने का काम कर रही हैं।
अमेरिकी जनता जंग के खिलाफ नहीं, डोनाल्ड ट्रंप का दावा
दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दावा किया कि अमेरिकी जनता अभी भी ईरान के खिलाफ चल रहे इस संघर्ष का समर्थन कर रही है। ट्रंप के अनुसार, लोगों की मुख्य चिंता युद्ध नहीं बल्कि ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस दुस्साहस की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि वे धीरे-धीरे कमजोर होते जा रहे हैं। जब ट्रंप से सवाल किया गया कि क्या अमेरिकी सैनिकों की मौत के बावजूद जनता अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियानों के साथ है, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका की जनता इस युद्ध के खिलाफ नहीं है।
अभी नहीं रुकने वाली है अमेरिका की सैन्य कार्रवाई
इससे पहले भी ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को आगाह किया था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी व्यावसायिक जहाज पर ईरान ने मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया, तो अमेरिका बदले में ईरान के किसी बिजलीघर या पुल को पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप ने इन बयानों से संकेत दिया है कि अमेरिका वर्तमान में लड़ाई खत्म करने के मूड में नहीं है। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और अमेरिकी सेना वहां से जाने वाली नहीं है। यह तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य के इर्द-गिर्द जारी संघर्ष के कारण बढ़ा है, जहां कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पर ईरान द्वारा लगाई गई रोक से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों पर काफी दबाव बना हुआ है।
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