रायपुर में मचा बवाल
नीट पेपर लीक विवाद की तपिश अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक पहुंच गई है। शहर में बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता उस समय आमने-सामने आ गए, जब दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस टकराव के दौरान जमकर धक्का-मुक्की और नारेबाजी हुई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा और वाटर कैनन के साथ-साथ आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े। इस पूरे घटनाक्रम में 16 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
क्या है पूरा मामला
इस पूरे हंगामे की शुरुआत नीट परीक्षा के मुद्दे पर हुई। कांग्रेस ने देश भर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का आह्वान किया था, जिसके तहत रायपुर में भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतले जलाए। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी ने दिल्ली में राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए विरोध प्रदर्शन का पलटवार करते हुए रायपुर में कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया। इसी दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एक ही स्थान पर भिड़ गए, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया।
बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े प्रदर्शनकारी
बीजेपी का यह विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब उनके कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय की तरफ बढ़ने लगे। प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव समेत पार्टी के कई विधायक और प्रमुख पदाधिकारी मौजूद थे। भीड़ इतनी उग्र हो गई कि कार्यकर्ताओं ने पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़ डाला। स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का सहारा लिया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस अफरा-तफरी के बीच दोनों तरफ से धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं।
पुलिसकर्मियों के घायल होने की पुष्टि
इस संघर्ष में 16 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। रायपुर के पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने अस्पताल पहुंचकर घायल जवानों का हालचाल जाना और उनके इलाज के संबंध में डॉक्टरों से विस्तृत चर्चा की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की ओर से पथराव किया गया और बोतलें फेंकी गईं, जिससे व्यवस्था बनाए रखने में जुटे पुलिस के जवान जख्मी हुए। फिलहाल, सभी घायल जवानों का इलाज जारी है।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर
इस घटना के बाद राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीसीसी संचार प्रमुख सुशील आनंद ने कहा कि बीजेपी ने अचानक कांग्रेस भवन को घेरने का फैसला लिया और उनके कार्यकर्ता वहां मौजूद कांग्रेसियों में डर पैदा कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का प्रदर्शन गांधीवादी तरीके से चल रहा था, लेकिन बीजेपी समर्थकों ने पानी के पाउच, चप्पल और पत्थरों से हमला किया। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि इस प्रदर्शन में शामिल कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बयान
दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। साव ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आड़ में संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाना और स्वयं को देश से ऊपर समझना पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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