मानसून सत्र का समय से पहले समापन
मध्य प्रदेश विधानसभा में चल रहे मानसून सत्र को समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह सत्र 20 जुलाई को आरंभ हुआ था और इसका कार्यक्रम 24 जुलाई तक निर्धारित था, लेकिन इसे निर्धारित समय से पूर्व ही समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इस तीन दिवसीय सत्र के दौरान राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए और कई अहम विधेयक पेश किए गए।
विपक्ष पर मुख्यमंत्री का तीखा कटाक्ष
सत्र के औपचारिक समापन के मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का नई संसदीय परंपराओं की शुरुआत के लिए आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष यानी कांग्रेस पर कड़े शब्दों में निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की आंखों पर 'दो नंबर का चश्मा' लगा हुआ है, जिसके कारण उन्हें सकारात्मक कार्य भी नजर नहीं आते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस हिंदू और मुसलमान के बीच भेदभाव की राजनीति करती है।
मोहन यादव ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें महात्मा गांधी के उपदेशों और संविधान की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष सत्र की अवधि को लेकर सवाल उठा रहा है, लेकिन उन्हें हनुमान जी की लंबी छलांग का स्मरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस सत्र में कई ऐसे अमिट अध्याय लिखे गए हैं जो राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।
किसानों और गेहूं खरीदी पर सरकार का पक्ष
विपक्ष द्वारा उठाए गए गेहूं और मूंग की खरीदी के मुद्दों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश के इतिहास में यदि कहीं सबसे ज्यादा गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी हुई है, तो वह मध्य प्रदेश की धरती ही है। उन्होंने दावा किया कि किसानों को जो समर्थन मूल्य हमारी सरकार ने दिया है, वह पूरे देश में किसी अन्य राज्य की तुलना में सर्वाधिक है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि नर्मदा घाटी परियोजना का काम वर्ष 1977 में शुरू हुआ था, लेकिन कांग्रेस के शासनकाल में मुख्यमंत्री ने कई बार यह दावा किया था कि नदी को नदी से जोड़ना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध का वास्तविक कार्य हमारी सरकार ने पूरा किया। कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए किसान केवल राजनीति का एक माध्यम रहे हैं।
विकास, बिजली और कर्ज पर स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में बिजली की उपलब्धता पर चर्चा करते हुए कहा कि आज प्रदेश का हर गांव रोशन है और उद्योगों को निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले के दौर में राज्यों को आपसी विवादों में उलझाकर रखा जाता था। हमारी सरकार ने केन-बेतवा और पार्वती-काली सिंध जैसी महत्वपूर्ण नदी परियोजनाओं के पुराने विवादों को सुलझाया है।
राज्य पर बढ़ते कर्ज के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि कर्ज लेने की एक निर्धारित सीमा होती है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की कर्ज स्थिति 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर है, जबकि कर्नाटक जैसे कांग्रेस शासित राज्य 40 प्रतिशत तक कर्ज में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में ड्रॉप आउट दर घटकर 0 प्रतिशत पर आ गई है।
जातिगत जनगणना और आरक्षण का मुद्दा
आरक्षण और जातिगत जनगणना के विषय पर सीएम ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब जातिगत जनगणना की दिशा में इतने बड़े स्तर पर कार्य हो रहा है, जिसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नकारात्मकता छोड़कर सरकार के साथ सकारात्मक सहयोग करना चाहिए।
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