छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी EOW की टीम ने जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल को आमने-सामने बैठाकर घंटों पूछताछ की। इस दौरान जांच एजेंसी ने दोनों के सामने कई तीखे सवाल रखे और उनके बयानों का मिलान कराया, लेकिन दोनों ही आरोपियों ने खुद पर लगे तमाम आरोपों को पूरी तरह नकार दिया।
जेल में हुआ आमना-सामना, दोनों आरोपियों ने नकारे आरोप
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, शराब घोटाले में दोनों की संदिग्ध भूमिकाओं और एक-दूसरे के खिलाफ मिले बयानों को लेकर यह आमने-सामने की पूछताछ की गई थी। EOW ने दोनों आरोपियों से पैसों के संदिग्ध लेनदेन और इस पूरे खेल में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारियां मांगी। इस कड़े आमने-सामने के दौरान भी अनवर ढेबर और रामगोपाल अग्रवाल ने किसी भी तरह की गड़बड़ी या घोटाले में शामिल होने की बात को स्वीकार नहीं किया। दोनों ने जांच अधिकारियों के सामने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं।
जांच अंतिम दौर में, दिल्ली भेजी गई टीम
EOW छत्तीसगढ़ के इस 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच को अब अपने अंतिम चरण में ले आई है। जांच एजेंसी इस मामले में पुख्ता कानूनी कार्रवाई के लिए तमाम दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक खातों के लेनदेन, गवाहों के बयान और पूछताछ में मिली जानकारियों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में व्यस्त है। संभावना जताई जा रही है कि बहुत जल्द ही इस मामले की विस्तृत चार्जशीट अदालत में पेश कर दी जाएगी।
इस घोटाले से जुड़े बड़े राजनीतिक चेहरों और रसूखदार आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने के लिए EOW की एक विशेष टीम को दिल्ली भी भेजा गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी कुछ बड़े नेताओं को बिना गिरफ्तार किए सीधे चार्जशीट में उनके नाम आरोपी के तौर पर शामिल करने की तैयारी में है। इसके अलावा, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की संपत्तियों और बड़े राजनीतिक चेहरों के साथ उनके पैसों के लेनदेन के सभी संदिग्ध पहलुओं की भी गहनता से जांच की जा रही है।
रामगोपाल अग्रवाल की पुलिस रिमांड और अदालती कार्रवाई
इस मामले में EOW ने पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद विशेष न्यायालय ने जांच एजेंसी की मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, ताकि उनसे आगे की कड़ियों को लेकर पूछताछ की जा सके। आपको बता दें कि रामगोपाल अग्रवाल इससे पहले कोल लेवी (कोयला लेवी) से जुड़े एक अन्य बड़े मामले में भी नौ दिन की पुलिस रिमांड पर रह चुके हैं, जहां उनसे कोयला सिंडिकेट से जुड़े मामलों में लंबी पूछताछ की गई थी।
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