राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच, आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने खुलासा किया है कि केंद्र सरकार ने विरोध जता रहे प्रदर्शनकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकार के साथ चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, बशर्ते यह बातचीत या तो जंतर-मंतर पर हो या फिर इसके लिए कोई निष्पक्ष (न्यूट्रल) जगह चुनी जाए। उन्होंने साफ कहा कि इस बार बातचीत के नाम पर समय की बर्बादी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नकारात्मक नारों पर पाबंदी और तय अनुशासन
आंदोलन के स्वरूप को लेकर जंतर-मंतर पर संवाददाताओं से बात करते हुए आशुतोष रांका ने प्रदर्शनकारियों को अनुशासित रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य पूरी तरह रचनात्मक है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को केवल चार विशेष नारों तक ही सीमित रहने का निर्देश दिया:
- भारत माता की जय
- इंकलाब जिंदाबाद
- जय भीम
- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो
रांका ने चिंता जताई कि कुछ ताकतें आंदोलन को बदनाम करने के लिए एक नकारात्मक विमर्श (नैरेटिव) तैयार करने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए, विरोध स्थल पर किसी भी प्रकार के नकारात्मक या अभद्र नारों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार को सख्त चेतावनी और आंदोलन की रूपरेखा
इससे पहले, सीजेपी प्रवक्ता ने केंद्र सरकार को गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने युवाओं की जायज मांगों को जल्द स्वीकार नहीं किया, तो देश का युवा वर्ग चुप नहीं बैठेगा और सत्ता को कड़ा जवाब देगा। उन्होंने हाल ही में 20 जुलाई को हुए बड़े मार्च को केवल एक 'ट्रेलर' बताते हुए कहा कि मुख्य फिल्म अभी बाकी है।
आशुतोष रांका ने इस विरोध-प्रदर्शन को आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को छात्रों के सब्र का इम्तिहान नहीं लेना चाहिए। यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं की गईं, तो देश के कोने-कोने से लाखों और युवा दिल्ली की तरफ कूच करेंगे, जिससे स्थिति को संभालना सरकार के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा।
पुलिसिया कार्रवाई का विरोध और एफआईआर रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों पर हिंसा भड़काने के आरोपों का पुरजोर खंडन करते हुए सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 20 जुलाई का प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के छात्रों पर बल प्रयोग किया, जिसके बाद ही वहां भगदड़ और अशांति की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले 31 दिनों से देश के युवा महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर चलते हुए धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन के भविष्य पर बात करते हुए रांका ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) को वापस लेने और भविष्य में ऐसी कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा। उन्होंने निडर होकर कहा कि वे या उनके साथी UAPA या NSA जैसी संगीन धाराओं के तहत होने वाली गिरफ्तारियों से बिल्कुल नहीं डरते हैं। उन्होंने देशहित में BJP सहित तमाम राजनीतिक दलों से इस राष्ट्रव्यापी युवा आंदोलन को अपना बिना शर्त समर्थन देने की अपील की।
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