बिहार के जहानाबाद जिले से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। रतनी प्रखंड के सलेमपुर गांव की रहने वाली 52 साल की रेखा देवी पिछले 25 वर्षों से समाज की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एक अनोखा अभियान चला रही हैं। रेखा देवी का परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह समृद्ध है। उनके पति पुलिस विभाग में दारोगा के पद पर कार्यरत हैं, जिसके कारण उन्हें किसी भी तरह की आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। इसके बावजूद, रेखा देवी ने ऐशो-आराम की जिंदगी चुनने के बजाय समाज सेवा और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की राह चुनी। वे ग्रामीण महिलाओं को बिना कोई शुल्क लिए, बिल्कुल मुफ्त में सिलाई का प्रशिक्षण दे रही हैं।
रेखा देवी का मानना है कि समाज में जब तक महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होंगी, तब तक देश और परिवार का सही विकास संभव नहीं है। उन्होंने अब तक अपने इस सेवा भाव से लगभग 500 महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें हुनरमंद बनाया है। उनके इस प्रयास से सैकड़ों महिलाएं आज सिलाई और कढ़ाई के दम पर अपने परिवार का आर्थिक हाथ बंटा रही हैं।
मुजफ्फरपुर से हुई थी इस सेवा भाव की शुरुआत
रेखा देवी के इस सराहनीय सफर की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। शादी के बाद लगभग 20 वर्षों तक वे अपने पति के साथ उनकी पुलिस ड्यूटी के दौरान अलग-अलग शहरों में रहीं। इसी दौरान मुजफ्फरपुर में रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि घर पर खाली बैठने के बजाय कुछ ऐसा रचनात्मक कार्य किया जाए जिससे समाज का भला हो सके। उन्होंने स्वयं पहले सिलाई सीखी और फिर इसे दूसरी महिलाओं तक पहुंचाने का संकल्प लिया। मुजफ्फरपुर में प्रवास के दौरान उन्होंने करीब 15 वर्षों तक लगातार महिलाओं को मुफ्त सिलाई सिखाई। इस अवधि में उन्होंने अकेले मुजफ्फरपुर में ही 250 से अधिक महिलाओं को सिलाई की बारीकियां सिखाकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाया।
जहानाबाद के अपने पैतृक गांव में फैलाया हुनर का उजाला
मुजफ्फरपुर के बाद जब रेखा देवी अपने पैतृक गांव जहानाबाद के रतनी प्रखंड अंतर्गत सलेमपुर लौटीं, तो उन्होंने अपने इस अभियान को थमने नहीं दिया। गांव आकर उन्होंने देखा कि यहां की ग्रामीण महिलाओं के पास हुनर सीखने के साधन बहुत सीमित हैं। ऐसे में उन्होंने अपने घर में रखी सिलाई मशीनों का उपयोग कर स्थानीय महिलाओं और युवतियों को मुफ्त प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया।
वर्तमान में रेखा देवी अपने गांव में सिलाई का प्रशिक्षण देने के लिए प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक सक्रिय रहती हैं। उन्होंने अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर एक-एक घंटे के कुल 3 बैच शुरू किए हैं। महज दो महीने पहले शुरू किए गए इस नए सत्र में फिलहाल करीब 50 महिलाएं और लड़कियां उनसे सिलाई सीख रही हैं। रेखा देवी के इस हुनर केंद्र की ख्याति इतनी बढ़ चुकी है कि अब सिलाई सीखने के लिए आसपास के गांवों से, जो लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, वहां से भी महिलाएं उनके पास आ रही हैं। इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त में रोजगारपरक शिक्षा मिल रही है, बल्कि रेखा देवी को भी समाज में असीम आत्मसम्मान और पहचान हासिल हो रही है।
हर नारी को सशक्त बनाने का अनोखा मिशन
अपनी इस मुहिम और विचारों के बारे में विस्तार से बात करते हुए रेखा देवी बताती हैं कि वे शुरू से ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा मिशन लेकर चल रही हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर केवल पुरुष ही घर में कमाते हैं, तो पूरे परिवार का खर्च चलाना कई बार एक भारी बोझ बन जाता है। लेकिन अगर घर की महिलाएं भी किसी हुनर में माहिर हो जाएं और अपने स्तर पर थोड़ा-बहुत भी कमाना शुरू कर दें, तो वे अपने पति और पूरे परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा बन सकती हैं।
रेखा देवी ने गर्व के साथ बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से लगातार इस पुनीत कार्य में लगी हुई हैं और अब तक 500 से अधिक महिलाओं को इस काबिल बना चुकी हैं कि वे खुद का काम शुरू कर सकें। गांव के स्तर पर इस काम को और बड़े पैमाने पर ले जाने का उनका संकल्प है। उनका अगला लक्ष्य ग्रामीण इलाकों की हर उस महिला तक पहुंचना है जो आर्थिक रूप से कमजोर है और आत्मनिर्भर बनना चाहती है। रेखा देवी का यह प्रयास सचमुच ग्रामीण समाज में बदलाव की एक नई बयार लेकर आया है।
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