NEET में बायोलॉजी के 'किंग' बने कृष्णा आनंद: 360/360 स्कोर करने का मंत्र, NCERT को बनाया आधार

सीतामढ़ी के रहने वाले कृष्णा आनंद ने नीट परीक्षा में बायोलॉजी में परफेक्ट 360 अंक हासिल किए हैं। जानिए उनकी पढ़ाई की खास रणनीति, जिसमें स्मार्टफोन से दूरी और PYQ की प्रैक्टिस सबसे महत्वपूर्ण रही।

नीट परीक्षा में कृष्णा आनंद की शानदार सफलता

नीट यानी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिनी जाती है, जिसे पास करना लाखों छात्रों का सपना होता है। इस कठिन दौड़ में सीतामढ़ी के मेधावी छात्र कृष्णा आनंद ने न केवल सफलता का परचम लहराया, बल्कि बायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषय में 360 में से 360 अंकों का परफेक्ट स्कोर हासिल करके एक मिसाल कायम की है। अपनी तैयारी के दौरान कोटा में रहकर पढ़ाई करने वाले कृष्णा का मानना है कि सफलता कोई चमत्कार नहीं, बल्कि सही दिशा में की गई मेहनत का परिणाम है। उनके अनुसार, अध्ययन सामग्री का सही चयन और निरंतरता ही किसी भी अभ्यर्थी को उसकी मंजिल तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होती है। आज कृष्णा अन्य मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बने हुए हैं।

पुराने प्रश्न-पत्रों की भूमिका

अपनी तैयारी की रणनीति साझा करते हुए कृष्णा आनंद ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाबी के लिए पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र यानी PYQ सबसे बड़ा हथियार साबित होते हैं। उन्होंने सभी छात्रों को यह सलाह दी है कि कम से कम 10 से 12 साल के पिछले प्रश्न-पत्रों को पूरी निष्ठा के साथ हल करना अनिवार्य है। कृष्णा के अनुसार, इससे न केवल परीक्षा के पैटर्न और पूछे जाने वाले प्रश्नों के स्तर की गहरी समझ विकसित होती है, बल्कि छात्र का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। वे बताते हैं कि नीट परीक्षा में कई प्रश्न बार-बार दोहराए जाने वाले महत्वपूर्ण टॉपिक्स से ही पूछे जाते हैं। इसलिए, अगर कोई छात्र इन विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है, तो परीक्षा के दौरान उसे घबराहट नहीं होती और वह बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहता है।

NCERT का महत्व और रिवीजन

जीव विज्ञान में पूरे अंक लाने का राज बताते हुए कृष्णा ने स्पष्ट किया कि NCERT की किताबें उनकी सफलता की मुख्य आधारशिला रहीं। उनका कहना है कि बायोलॉजी के लिए छात्र को एनसीईआरटी की एक-एक लाइन को इतनी बार पढ़ना और दोहराना चाहिए कि पूरी किताब उनके दिमाग में छप जाए। रिवीजन का महत्व बताते हुए वे कहते हैं कि जितनी अधिक बार आप रिवीजन करेंगे, परीक्षा के दौरान गलतियां होने की संभावना उतनी ही कम होती जाएगी। वहीं, भौतिक विज्ञान यानी फिजिक्स और रसायन विज्ञान यानी केमिस्ट्री के लिए उन्होंने बताया कि इन विषयों में सफलता का रास्ता थ्योरी से ज्यादा न्यूमेरिकल्स के नियमित अभ्यास और सभी जरूरी फॉर्मूलों को याद करने से निकलता है। इन विषयों के लिए निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।

लचीला टाइम-टेबल और दिनचर्या

अपनी दैनिक दिनचर्या पर चर्चा करते हुए कृष्णा ने कहा कि बहुत ज्यादा सख्त या कठोर टाइम-टेबल के बजाय वे लक्ष्य आधारित रूटीन को ज्यादा तरजीह देते थे। कोटा में रहने के दौरान वे सुबह साढ़े सात से आठ बजे के बीच अपनी नींद पूरी करके उठते थे। इसके बाद उनका अधिकांश समय कोचिंग की कक्षाओं में बीतता था, जो दोपहर दो बजे से शुरू होकर रात साढ़े आठ बजे तक चलती थीं। पढ़ाई के दौरान मानसिक एकाग्रता और ताजगी बनाए रखने के लिए वे बीच-बीच में छोटे अंतराल लेना बहुत जरूरी मानते हैं। यदि कभी किसी दिन एक-दो घंटे का समय खराब भी हो जाए, तो वे तनाव लेने के बजाय शेष समय में अपने दैनिक लक्ष्य को पूरा करने पर ध्यान देते थे।

डिजिटल भटकाव से दूरी और परिवार का साथ

कृष्णा आनंद ने अपनी सफलता में डिजिटल भटकाव से बचने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में स्मार्टफोन के उपयोग से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, जिसे देखते हुए उन्होंने स्मार्टफोन से पूरी तरह किनारा कर लिया और कीपैड वाले साधारण फोन पर शिफ्ट हो गए। इसके अलावा, तैयारी के अंतिम तीन महीनों में उनके बड़े भाई ने उनके साथ रहकर न केवल उनका मार्गदर्शन किया, बल्कि सभी जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए। कृष्णा के अनुसार, परिवार का सहयोग, स्मार्टफोन से पूरी तरह दूरी और अनुशासित दिनचर्या ही वह मार्ग था जिसने उनकी सफलता को संभव बनाया। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि छात्र पूरी तरह से अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहे, तो सफलता निश्चित है।

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