प्लास्टिक को बाय-बाय! भागलपुर के युवक ने बांस से बनाई शानदार घड़ियां और लैंप, सोशल मीडिया से सीखी कला

भागलपुर के तेतरी गांव में चंदन सिंह बांस से बने सजावटी सामानों के जरिए पर्यावरण को बचाने और लोगों को आकर्षित करने का काम कर रहे हैं। बांस की ये कलाकृतियां अब घरों की खूबसूरती बढ़ाने का जरिया बन गई हैं।

प्लास्टिक के विकल्प के रूप में उभरे बांस के उत्पाद

आज के दौर में घरों को सजाने के लिए बाजार में प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री की भरमार है, लेकिन अब एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। भागलपुर जिले के तेतरी गांव के लोग तेजी से प्लास्टिक का मोह त्यागकर बांस से बने सजावटी सामानों को अपना रहे हैं। यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि इसे सनातन परंपरा में भी काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बांस की मौजूदगी घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है और इसे वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण से लोग अब घरों की सजावट के लिए पारंपरिक उत्पादों की तुलना में बांस की बनी कलाकृतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सोशल मीडिया से हुनर को मिली नई दिशा

इस अनूठी पहल के पीछे भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल के तेतरी गांव के रहने वाले चंदन सिंह की मेहनत है। चंदन सिंह बांस की सामग्री बनाने में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। अपनी कला के सफर के बारे में बात करते हुए चंदन ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बांस के साथ काम करने का बहुत शौक था, लेकिन शुरुआत में उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में उन्होंने इंटरनेट और सोशल मीडिया का सहारा लिया। डिजिटल माध्यमों पर बांस से बनी बेहतरीन आकृतियों और डिजाइनों को देखकर उन्होंने इसे खुद बनाने का निश्चय किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह काम काफी चुनौतीपूर्ण था और कई बार उनका मन डोलता था कि क्या वे ऐसा कर पाएंगे, लेकिन धैर्य और लगन ने उन्हें आगे बढ़ाया। उनका मानना है कि बांस देखने में साधारण लगता है, लेकिन इससे किसी भी वस्तु को आकार देने के लिए बेहद बारीकी और मेहनत की आवश्यकता होती है।

बाजार में बांस के सामानों की बढ़ती मांग

चंदन द्वारा बनाई गई सामग्री अब लोगों की पसंद बन चुकी है। जब उन्होंने अपने उत्पादों को स्थानीय मेलों में प्रदर्शित करना शुरू किया, तो लोगों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। चंदन बताते हैं कि अब उन्हें विशेष ऑर्डर मिलने लगे हैं। उनके द्वारा बनाई गई झालरें, घड़ियां, टेबल लैंप, और पेन स्टैंड की जबरदस्त मांग है। इन चीजों की फिनिशिंग इतनी शानदार होती है कि लोग इन्हें सजावट के लिए पहली पसंद मान रहे हैं। धीरे-धीरे उनके काम का दायरा बढ़ा और अब वे घरों में इस्तेमाल होने वाले जूते स्टैंड, डिजाइनर टेबल और सजावटी बांस की नाव जैसी कई अन्य चीजें भी तैयार कर रहे हैं। इन उत्पादों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं और घर को एक प्राकृतिक लुक प्रदान करते हैं।

बांस से तैयार होने वाले उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला

तेतरी गांव की पहचान अब बांस की कलाकृतियों से हो रही है। चंदन की कार्यशाला में तैयार होने वाली चीजों की सूची काफी लंबी है। मुख्य रूप से यहां निम्नलिखित सामग्री बनाई जा रही है:

  • घड़ियां: दीवारों पर लगाने वाली बांस की बनी सुंदर घड़ी।
  • प्रकाश व्यवस्था: टेबल लैंप और विभिन्न डिजाइनों वाली लाइट।
  • लेखन सामग्री: दफ्तर और घरों के लिए आकर्षक पेन स्टैंड।
  • घर की सजावट: झालर, बांस से बनी नाव और टेबल-कुर्सियां।
  • अन्य उपयोगी सामान: जूतों को रखने के लिए स्टैंड और अन्य स्टैंडी।

यह गांव अब पारंपरिक लकड़ी के काम के साथ-साथ बांस के सूक्ष्म शिल्प के लिए भी जाना जा रहा है, जिससे कारीगरों को एक नई पहचान मिल रही है।

स्थानीय शिल्प और रोजगार का बढ़ता दायरा

बांस के इन उत्पादों ने न केवल तेतरी गांव को एक नई आर्थिक दिशा दी है, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। चंदन का प्रयास अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है, जहां लोग न केवल घर की सजावट कर रहे हैं बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं। नवगछिया के कारीगरों की यह रचनात्मकता स्थानीय शिल्प को पूरे देशभर में एक अलग पहचान दिला रही है। प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की दिशा में यह एक छोटा सा प्रयास हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव काफी बड़ा है। आने वाले समय में चंदन को उम्मीद है कि लोग और अधिक संख्या में बांस की बनी वस्तुओं को अपनाएंगे, जिससे न केवल उनकी कारीगरी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जन-जन तक पहुंचेगा।

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