बरसात के मौसम में बैंगन की खेती और चुनौतियां
बरसात का समय बैंगन उगाने वाले किसानों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इस दौरान फसल का उत्पादन काफी अच्छा होता है और बाजार में बैंगन की मांग भी लगातार बनी रहती है। हालांकि, यह सीजन अपने साथ कुछ परेशानियां भी लेकर आता है। बालोद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. बलदेव अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि किसान सावधानी नहीं बरतते हैं, तो एक खतरनाक कीट उनकी मेहनत पर पानी फेर सकता है। सही प्रबंधन और समय पर उचित देखभाल करने से ही किसान अपनी फसल को बचाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
फ्रूट एंड शूट बोरर का प्रकोप
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बलदेव अग्रवाल के अनुसार, बैंगन की फसल में फ्रूट एंड शूट बोरर नामक कीट सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आता है। यह कीट बैंगन की फसल को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। इसकी कार्यप्रणाली को समझना किसानों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह बाहर से हमला करने के बजाय भीतर से पौधे और फल को खत्म करता है। यह कीट अपनी वयस्क अवस्था में बैंगन के फूलों पर ही अपने अंडे दे देता है। जैसे-जैसे फूल फल का रूप लेता है, वैसे-वैसे अंडे फल के भीतर ही सुरक्षित रह जाते हैं।
कैसे काम करता है यह नुकसानदेह कीट
अंडों से निकलने वाला लार्वा पूरी तरह से फल के अंदर पलकर बड़ा होता है। यह फल के आंतरिक हिस्से को धीरे-धीरे खाता रहता है, जिससे बाहर से देखने पर फल अच्छा लग सकता है लेकिन अंदर से वह पूरी तरह खोखला हो चुका होता है। जब यह लार्वा विकसित हो जाता है, तो फल को अंदर से काटते हुए बाहर निकल आता है। कई बार किसानों को गलतफहमी हो जाती है कि कीट बाहर से फल के अंदर घुसा है, जबकि सच्चाई यह है कि वह अंदर से बाहर की ओर आता है। यही कारण है कि फल के भीतर छिपे होने की वजह से कीटनाशक दवाओं का असर उन पर बहुत कम हो पाता है।
पौधे की वृद्धि पर असर
यह कीट केवल फलों को ही निशाना नहीं बनाता, बल्कि बैंगन के पौधे के सबसे कोमल ऊपरी हिस्से यानी फोंक को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। कीट कोमल शीर्ष भाग को काट देता है, जिससे पौधे का ऊपरी हिस्सा झुक जाता है और उसकी प्राकृतिक वृद्धि रुक जाती है। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिन पौधों में ऐसे संक्रमित फोंक दिखाई दें, उन्हें तुरंत तोड़ देना चाहिए। इन संक्रमित हिस्सों को एक पॉलिथीन बैग में इकट्ठा करें और खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर दें ताकि कीट के दोबारा फैलने की संभावना न रहे।
कीट नियंत्रण के कारगर उपाय
डॉ. अग्रवाल ने किसानों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव करने से पहले एक महत्वपूर्ण कदम जरूर उठाएं। छिड़काव के पहले पौधे पर लगे सभी संक्रमित और खराब फलों को चुनकर अलग कर दें। इसके बाद ही मार्शल और केलडान जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। इस विधि से कीट पर नियंत्रण पाना बहुत अधिक प्रभावी हो जाता है और फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बेहतर फसल के लिए किस्मों का चयन
छत्तीसगढ़ की स्थानीय जलवायु और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने कुछ चुनिंदा किस्मों को उगाने का सुझाव दिया है। यदि कोई किसान मोटे बैंगन की खेती करना चाहता है, तो पूसा क्रांति एक बेहतरीन किस्म साबित हो सकती है। वहीं, यदि किसान लंबे और पतले बैंगन की पैदावार लेना चाहते हैं, तो VNR-212 को एक बेहतर विकल्प माना जाता है। यदि किसान सही बीज के चुनाव के साथ-साथ कीट प्रबंधन की तकनीकों का सही समय पर पालन करें, तो वे इस बरसात के मौसम में बैंगन की खेती से न केवल अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति में भी सुधार ला सकते हैं।
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