खेती में आधुनिक तकनीक का कमाल
आज के दौर में खेती को अगर सही ढंग और वैज्ञानिक तकनीकों के साथ किया जाए, तो यह मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है। बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड स्थित सरैयाटांड़ गांव के रहने वाले किसान संतोष कुमार महतो ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने अपनी जमीन के एक छोटे से हिस्से को अपनी कमाई का बड़ा जरिया बना लिया है। संतोष कुमार महतो ने 50 डिसमिल जमीन का उपयोग करते हुए मचान विधि से बरबटी की खेती करने का निर्णय लिया और आज वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक उदाहरण बन गए हैं।
फसल तैयार होने की प्रक्रिया और समय
किसान संतोष कुमार महतो बताते हैं कि खेती उनका पुश्तैनी काम है और वे अपने पूर्वजों से प्रेरित होकर इस कार्य में आगे बढ़े हैं। उन्होंने अपनी बरबटी की बुवाई मई महीने में पूरी की थी। इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में तैयार होना है। संतोष के अनुसार, बरबटी की फसल रोपाई के बाद महज 45 से 60 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है। एक बार जब फसल तुड़ाई के लायक हो जाती है, तो किसान अगले 2 महीने तक लगातार उससे पैदावार ले सकते हैं। इस निरंतरता के कारण उन्हें बाजार में नियमित रूप से आय प्राप्त होती रहती है।
लागत और मुनाफे का पूरा गणित
संतोष महतो द्वारा अपनाई गई खेती की विधि आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद है। उनके अनुसार, 50 डिसमिल जमीन पर बरबटी की पूरी फसल तैयार करने में कुल 20 हजार रुपये की लागत आती है। यदि किसान फसल की सही देखरेख करें और उचित खाद-पानी का ध्यान रखें, तो इसी छोटे भूभाग से 60 से 70 क्विंटल तक बरबटी का बंपर उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है। बाजार में बरबटी का भाव औसतन 25 से 30 रुपये प्रति किलो के आसपास रहता है। इस आंकड़ों के आधार पर, 50 डिसमिल जमीन से किसान 1.50 लाख रुपये तक की कुल बिक्री कर सकते हैं। कुल बिक्री में से 20 हजार रुपये की लागत घटाने के बाद, उन्हें लगभग 1.30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।
कीट प्रबंधन की दी सलाह
अपनी सफलता का राज साझा करते हुए संतोष महतो ने अन्य किसानों को सचेत भी किया है। उनका मानना है कि बरबटी की खेती में कीटों का प्रकोप होने की संभावना सबसे अधिक रहती है। यदि सही समय पर कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया गया और खेत का उचित प्रबंधन नहीं हुआ, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। वे बताते हैं कि यदि फसल को कीटों के हमले से सुरक्षित रखा जाए और प्रबंधन पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो निश्चित रूप से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे आमदनी में भी इजाफा होता है।
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