3000 बच्चों की बदली तकदीर, आधी सैलरी शिक्षा पर खर्च करने वाले दुर्गाराम मुवाल की कहानी

उदयपुर के शिक्षक दुर्गाराम मुवाल ने अपने वेतन का आधा हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर उन्हें बाल श्रम के अंधेरे से बाहर निकाला है। उनके इसी समर्पित जज्बे के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल

उदयपुर के शिक्षक दुर्गाराम मुवाल ने शिक्षा के प्रति अपने समर्पण से समाज के सामने एक नई नजीर पेश की है। उन्होंने न केवल अपने पेशे के प्रति ईमानदारी बरती, बल्कि अपनी निजी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दिया जो आर्थिक तंगी या सामाजिक दबाव के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे थे।

आधी सैलरी से बच्चों को दिलाया शिक्षा का अधिकार

दुर्गाराम मुवाल ने अपने वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा समाज के वंचित और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा पर खर्च करना शुरू किया। उनका मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को बाल मजदूरी के दलदल से निकालकर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना था। उनके इस निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि आज 3000 से अधिक बच्चे बाल श्रम छोड़कर स्कूल जा रहे हैं और अपना भविष्य उज्ज्वल बना रहे हैं।

राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा गया

शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इस सराहनीय और सामाजिक बदलाव लाने वाले काम के लिए दुर्गाराम मुवाल को राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनके द्वारा वर्षों से किए जा रहे निस्वार्थ योगदान और बच्चों के जीवन में बदलाव लाने की प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।

प्रेरणा की एक दास्तान

आज दुर्गाराम मुवाल की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो समाज में बदलाव लाना चाहता है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन लाया जा सकता है। शिक्षा के प्रति उनका यह जज्बा न केवल उन 3000 बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ है, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी सेवा का मार्ग प्रशस्त करता है।

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