फर्जी बैंक शाखा का जाल
गुजरात के दाहोद जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कुछ शातिर बदमाशों ने एक मशहूर निजी बैंक के नाम का गलत इस्तेमाल करते हुए उसकी एक फर्जी शाखा खोल ली। इस फर्जीवाड़े का शिकार एक स्थानीय सर्राफ बना, जिसे बदमाशों ने लाखों रुपये के चूना लगाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस की मुस्तैद कार्रवाई के चलते तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और लूटा गया पूरा सोना बरामद कर लिया गया है।
इस तरह दिया वारदात को अंजाम
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 15 जुलाई को हुई थी। आरोपियों ने खुद को उस नामी निजी बैंक का कर्मचारी बताकर 'महावीर ज्वेलर्स' के मालिक से संपर्क किया। ठगों ने सर्राफ के सामने एक बड़ी खरीदारी का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि अगले दिन आयोजित होने वाली रथ यात्रा में दान देने के उद्देश्य से उन्हें 200 ग्राम सोने के बिस्किट की तत्काल आवश्यकता है। सर्राफ ने इसे एक सामान्य व्यापारिक सौदा समझकर स्वीकार कर लिया।
सौदा पक्का होने के बाद, आरोपियों ने सर्राफ को एक पते पर बुलाया, जो वास्तव में उस बैंक की एक फर्जी शाखा थी जिसे उन्होंने खुद ही बनाया था। उस पते पर पहुँचने के बाद, सर्राफ ने बिना किसी संदेह के अपना 200 ग्राम सोना, जिसकी कीमत लगभग 28.60 लाख रुपये बताई जा रही है, आरोपियों के हवाले कर दिया।
बैग में नोटों की जगह मिले कागज
सोना हासिल करने के बाद, शातिरों ने सर्राफ को एक बैग थमाया। उन्होंने बड़े ही भरोसे के साथ कहा कि इस बैग में सोने की आधी कीमत रखी है और बाकी के पैसों की व्यवस्था भी जल्द ही कर दी जाएगी। सर्राफ उनकी बातों पर यकीन कर वहां इंतजार करने लगा। लेकिन, कुछ समय बीतने के बाद जब उसने बैग खोलकर देखा, तो उसके होश उड़ गए। बैग के अंदर नोटों का एक भी बंडल नहीं था, बल्कि उसे सिर्फ कोरे कागज थमा दिए गए थे। इसी दौरान आरोपी बैंक के पिछले दरवाजे से मौके का फायदा उठाकर फरार हो चुके थे।
पुलिस ने ऐसे पकड़ा आरोपियों को
ठगी का अहसास होते ही सर्राफ ने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी। दाहोद की स्थानीय अपराध शाखा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई कार की पहचान कर ली। पुलिस की नजरें आरोपियों पर टिकी थीं। सोमवार के दिन जब वही संदिग्ध कार राजस्थान की ओर से दाहोद की तरफ आती दिखाई दी, तो पुलिस ने उसे रुकवा लिया।
कार में सवार तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान खेड़ा निवासी दीपक सिंह राजपूत, राजस्थान के ललित कुमार राठौड़ और आदिल माजिद के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि ललित ने सर्राफ का भरोसा जीतने का काम किया था, जबकि मुख्य योजना दीपक सिंह ने बनाई थी और आदिल इस पूरी ठगी में उनकी मदद कर रहा था। पुलिस उपाधीक्षक जेपी भंडारी ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से सारा सोना बरामद कर लिया गया है और फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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