तृणमूल कांग्रेस में घमासान: अभिषेक बनर्जी ने विधायक मदन मित्रा को भेजा कानूनी नोटिस, मानहानि का आरोप

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के बागी विधायक मदन मित्रा के खिलाफ कानूनी कदम उठाया है। मदन मित्रा द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर यह नोटिस भेजा गया है।

मदन मित्रा के बयानों पर अभिषेक बनर्जी सख्त

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी कलह एक नए स्तर पर पहुंच गई है। पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने ही दल के बागी विधायक मदन मित्रा को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा है। यह कदम मदन मित्रा द्वारा हाल ही में दिए गए उन बयानों के बाद उठाया गया है, जिनमें उन्होंने अभिषेक बनर्जी को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। जानकारी के अनुसार, मदन मित्रा हाल ही में रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हुए थे, जिसके बाद से ही राज्य की राजनीति में गहमागहमी बढ़ गई है।

गंभीर आरोपों पर जताई कड़ी आपत्ति

कानूनी नोटिस के माध्यम से अभिषेक बनर्जी ने उन दावों को खारिज किया है जो मदन मित्रा ने उन पर लगाए थे। मदन मित्रा ने सार्वजनिक मंच से अभिषेक बनर्जी को ‘अपराधी’ और ‘हत्यारा’ जैसे संबोधन दिए थे। इतना ही नहीं, उन पर यह आरोप भी मढ़ा गया था कि वे सुपारी देकर हत्याएं करवाने और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने का काम करते हैं। इन बेहद गंभीर और व्यक्तिगत हमलों के चलते सांसद की ओर से यह नोटिस जारी किया गया है।

आरोपों को बताया आधारहीन और मनगढ़ंत

अभिषेक बनर्जी की कानूनी टीम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मदन मित्रा द्वारा लगाए गए ये सभी आरोप पूरी तरह से तथ्यहीन, झूठे और मनगढ़ंत हैं। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि इन बेबुनियाद आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और इनका एकमात्र उद्देश्य उनकी छवि को धूमिल करना है। अभिषेक बनर्जी का कहना है कि मदन मित्रा खुद एक वरिष्ठ राजनेता हैं, इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा का पालन नहीं किया और पूरी तरह से अपमानजनक शब्दों का चयन किया।

प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास

नोटिस में आगे उल्लेख किया गया है कि मदन मित्रा भली-भांति जानते हैं कि उनके द्वारा दिए गए ये बयान पूरी तरह से झूठ पर आधारित हैं। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि यह सब उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया है। टीएमसी के भीतर जारी इस कानूनी जंग ने पार्टी की आंतरिक कलह को और उजागर कर दिया है। मदन मित्रा के रितब्रता बनर्जी के गुट में शामिल होने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के अंदर उठापटक का दौर जारी है। टीएमसी, जो कि विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद से ही विभिन्न संकटों का सामना कर रही है, अब अपने ही नेताओं के बागी तेवरों से जूझ रही है। पार्टी के कई सांसद और विधायक अब ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर भी पार्टी के संगठन में हलचल मची हुई है। इस कानूनी नोटिस के बाद से अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मदन मित्रा का अगला कदम क्या होता है।

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